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March 18, 2025
हिमाचल में सेब की खेती को तबाह करने की साजिश, विधानसभा में गूंजा मामला
नेगी के गोल-मोल जवाब से संतुष्ट नहीं हुए कुलदीप राठौर
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शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के सातवें दिन मंगलवार को राज्य में सेब की खेती को तबाह करने की साजिश को लेकर सदस्यों ने चिंता जताई। असल में इटली से सेब के पौधे मंगाकर उन्हें बिना एक साल तक क्वारेंटीन किए सीधे बगीचों में लगाया जा रहा है। यह गैरकानूनी काम है। अगर इन विदेशी पौधों में कोई खतरनाक वायरस हुआ तो पूरे हिमाचल में सेब के पौधों को बीमारी लग जाएगी।
केवल इटली ही नहीं, बल्कि दूसरे देशों से भी सेब के पौधे मंगवाकर बिना अनुमति के सीधे बगीचों में लगाए जा रहे हैं। बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि सेब के प्लांट अवैध ढंग से लाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। बिना क्वारंटीन के पौधे लाने की इजाजत नहीं होगी। बागवानी विश्वविद्यालय के साथ रिव्यू मीटिंग करेंगे। उन्होंने कहा कि पैदावार बढ़ाने के लिए आयात जरूरी है, क्योंकि यूरोप-अमेरिका में 50 टन प्रति हेक्टेयर पैदावार हो रही है, जबकि हमारे प्रदेश में 10 टन प्रति हेक्टेयर हो रहा है।
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लेकिन ठियोग के कांग्रेस विधायक कुलदीप राठौर अपनी ही सरकार के इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने कहा कि विदेश से जो सेब के पौधे लाए जा रहे है, उनके खिलाफ कार्रवाई का जवाब में जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि बाहर से आ रहे प्लांट के साथ वायरस आ सकता है। यह हमारे सेब उद्योग के लिए खतरा हो सकता है। सेब की उन्नत किस्में बागवानी विश्वविद्यालय द्वारा मुहैया कराई जानी चाहिए। इसलिए यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई है।
पोस्ट एंट्री क्वारैंटाइन रूल्स के तहत इम्पोर्ट किए जाने वाले पौधे एक साल तक बागवानी विशेषज्ञ की देखरेख में रहने चाहिए। मगर हिमाचल में अधिकांश इंपोर्टर सेब के पौधे सीधे इटली से लाकर बगीचों में लगा रहे हैं। भाजपा विधायक बलबीर शर्मा ने कहा कि नियमों के मुताबिक विदेशों से आने वाले पौधों को एक साल तक क्वारंटाइन किया जाना जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।