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February 20, 2026

हिमाचल में बढ़ेगी महंगाई: सुक्खू सरकार ने एंट्री फीस के बाद अब फल-सब्जियों पर लगाई मार्केट फीस

वाहनों की एंट्री फीस फल सब्जियों पर लगाई मार्केट फीस आम जनता पर डालेगी बोझ

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Himachal Pradesh market fee hike

शिमला। हिमाचल प्रदेश की जनता पर अब महंगाई का बोझ बढ़ने वाला है। महंगाई अपनी दोनों बाहें फैलाए लोगों का इस्तबाल करने के लिए तैयार खड़ी है। इसका बड़ा कारण सुक्खू सरकार के कड़े फैसले हैं। हिमाचल प्रदेश को आर्थिक संकट से बाहर निकालने के लिए सुक्खू सरकार द्वारा अभी हाल ही में लिए गए निर्णयों का असर आम जनता पर पड़ने वाला है। यानी अब आम जनता की जेब से ही सुक्खू सरकार का खजाना भरेगा। 

राजस्व जुटाने को लिया बड़ा फैसला

दरअसल हिमाचल प्रदेश में आर्थिक चुनौतियों के बीच सरकार ने राजस्व बढ़ाने के लिए वाहनों की एंट्री फीस के बाद अब एक और बड़ा फैसला लिया है। राज्य में अब सभी फल और सब्जियों पर एक प्रतिशत मंडी शुल्क दोबारा लागू किया जाएगा। यह शुल्क मंडियों के भीतर होने वाली खरीद.फरोख्त के साथ.साथ सड़क किनारे लगने वाले अस्थायी बाजारों से भी वसूला जाएगा। कृषि विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं।

 

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एंट्री फीस और मार्केट फीस से बढ़ेगी महंगाई

बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की एंट्री फीस बढ़ने से हर चीज महंगी होगी। इसके अलावा अब फल सब्जियों पर मंडी शुल्क लगने के बाद इनके दामों में भी बढ़ोतरी होगी। जिसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। यानी सरकार का राजस्व तो बढ़ेगा, लेकिन उसका पैसा सीधा जनता की जेब से ही जाएगा। 

पुरानी व्यवस्था की वापसी

बता दें कि वर्ष 2014 में फल और सब्जियों पर मंडी शुल्क की वसूली रोक दी गई थी। उस समय महंगाई को देखते हुए यह निर्णय लिया गया था। अब प्रदेश की आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज के दबाव के बीच सरकार ने 14 जनवरी 2014 की अधिसूचना को निरस्त कर दिया है। यह कदम सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने उठाया है] जो पहले ही विभिन्न माध्यमों से अतिरिक्त राजस्व जुटाने की कोशिश कर रही है।

 

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कर्ज के बोझ और अनुदान बंद होने का असर

प्रदेश पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है। केंद्र से मिलने वाली कुछ महत्वपूर्ण राजकोषीय सहायता बंद होने के बाद राज्य की वित्तीय स्थिति और दबाव में आ गई है। ऐसे में सरकार लगातार नए स्रोतों से आय बढ़ाने की दिशा में निर्णय ले रही है। फल और सब्जियों पर मंडी शुल्क की बहाली भी इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।

मंडी समितियों को 40 से 50 करोड़ की उम्मीद

इस फैसले से प्रदेश की कृषि उपज विपणन समितियों को सालाना 40 से 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने का अनुमान है। सरकार का तर्क है कि इस राशि का उपयोग मंडियों के बुनियादी ढांचे, ग्रामीण सड़कों और सुविधाओं के विकास में किया जाएगा।

 

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व्यापारियों पर बढ़ेगा बोझ

अब एक करोड़ रुपये के फल और सब्जियां बेचने वाले व्यापारी को एक लाख रुपये मंडी शुल्क के रूप में जमा कराने होंगे। पहले केवल सेब पर शुल्क लिया जाता था, लेकिन अब सभी फलों और सब्जियों को इसके दायरे में लाया गया है। इससे व्यापारियों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर सीधे तौर पर खुदरा कीमतों पर पड़ने की आशंका है।

बाहरी राज्यों से आने वाले कारोबारियों पर भी असर

प्रदेश में बाहरी राज्यों से आने वाले फल और सब्जियों पर भी एक प्रतिशत शुल्क लगाया जाएगा। प्रवेश द्वारों पर ही यह राशि वसूली जाएगी। साथ ही बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों की प्रवेश शुल्क में बढ़ोतरी की चर्चा भी बाजार में है। इससे परिवहन लागत में वृद्धि होगी, जो अंततः उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी।

 

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आम जनता की जेब पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि जब थोक स्तर पर लागत बढ़ती है तो खुदरा बाजार में कीमतें बढ़ना तय होता है। ऐसे में आने वाले समय में फल और सब्जियों के दाम बढ़ सकते हैं। महंगाई पहले ही लोगों की चिंता का विषय बनी हुई है और अब यह निर्णय आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है।

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