#यूटिलिटी
February 20, 2026
सुक्खू सरकार ने शुरू किया नया ट्रेंड- शादी से पहले होगी युवाओं की ट्रेनिंग, प्री-मैरिटल सेंटर में लगेगी क्लास
‘तेरे मेरे सपने’ योजना से मजबूत होंगे रिश्ते
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शिमला। आजकल रिश्ते टूटने में वक्त नहीं लगता। कभी मोबाइल पर आख़िरी बार देखे गए ऑनलाइन स्टेटस पर तकरार, कभी खर्चों को लेकर बहस, तो कभी उम्मीदों का बोझ और देखते ही देखते बात इतनी अधिक बढ़ जाती है कि मामला या तो पुलिस तक पहुंचता है या फिर सीधे कोर्ट। शादी जो कभी सात जन्मों का वादा मानी जाती थी, अब कई बार सात महीनों में ही दरक जाती है। इसी बदलते सामाजिक परिदृश्य को देखते हुए हिमाचल सरकार ने एक नई पहल शुरू की है, जिससे शादी से पहले संवाद किया जाएगा और समझाया जाएगा।
बता दें कि प्रदेश में तेरे मेरे सपने नाम से एक प्री मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर स्थापित करने जा रही है। हर जिले में संवाद केंद्र खुलेंगे, जहां युवाओं को वैवाहिक जीवन की वास्तविकताओं, जिम्मेदारियों और आपसी तालमेल के व्यावहारिक पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया जाएगा।
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घरेलू हिंसा और पारिवारिक विवादों के बढ़ते मामलों ने प्रशासन को चिंतित किया है। कांगड़ा जैसे जिलों में बीते वर्ष की तुलना में घरेलू झगड़ों के मामलों में लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। चालू वित्त वर्ष के नवंबर तक ही सैकड़ों मामले दर्ज हो चुके हैं। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि कई जोड़ों के बीच समझौते भी कराए गए, लेकिन बड़ी संख्या में मामले अभी भी अदालती प्रक्रिया में हैं।
विश्लेषण में सामने आया है कि नशे की लत और एक-दूसरे से अत्यधिक अपेक्षाएं कलह की बड़ी वजह बन रही हैं। देहरा, बैजनाथ, धर्मशाला और नूरपुर जैसे क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है।
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राष्ट्रीय महिला आयोग के निर्देशों के बाद मुख्य सचिव स्तर पर यह निर्णय लिया गया कि हर जिले में ऐसे केंद्र जल्द स्थापित किए जाएं। महिला एवं बाल विकास विभाग को इनका संचालन सौंपा गया है। यहां युवाओं को संवाद कौशल, आर्थिक योजना, जिम्मेदारियों का बंटवारा, तनाव प्रबंधन और विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के तरीके सिखाए जाएंगे।
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महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक पंकज ललित ने बताया कि उद्देश्य युवाओं को वैवाहिक जीवन की चुनौतियों के प्रति जागरूक करना है ताकि वे मजबूत नींव के साथ नई शुरुआत कर सकें।
सरकार की यह पहल केवल काउंसलिंग कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलते समाज में रिश्तों को बचाने की कोशिश मानी जा रही है। यदि शादी से पहले ही संवाद, समझ और संतुलन की सीख मिल जाए, तो कई घर टूटने से बच सकते हैं।
अब देखना यह होगा कि क्या ‘तेरे मेरे सपने’ पहल सचमुच परिवारों को टूटने से बचा पाएगी, या यह भी सरकारी योजनाओं की भीड़ में एक और प्रयोग बनकर रह जाएगी।