#यूटिलिटी
January 22, 2026
सिमटता HRTC : घाटे का हवाला देकर बंद किए गांव के 15 रूट, निजी ऑपरेटरों को सौंपने की तैयारी
निजी बस ऑपरेटरों से बस सेवाएं चलाने के लिए 8 फरवरी तक आवेदन मांगे हैं
शेयर करें:

सिरमौर। हिमाचल की सड़कों पर हरी-सफेद रंग की सरकारी बसें सिर्फ सफर का जरिया नहीं, बल्कि भरोसे का प्रतीक रही हैं। लेकिन अब यह भरोसा धीरे-धीरे सिस्टम से खिसकता नजर आ रहा है।
एक के बाद एक घाटे का हवाला देकर सरकारी रूट सरेंडर किए जा रहे हैं और उन्हें निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। ताजा मामला सिरमौर से सामने आया है, जहां HRTC ने 15 बस रूट निजी ऑपरेटरों के लिए खोल दिए हैं।
HRTC ने लंबे समय से घाटे में चल रहे रूटों को अनइकोनॉमिक घोषित करते हुए सरेंडर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी कड़ी में जिला सिरमौर के 15 रूटों को निजी बस ऑपरेटरों के लिए खोल दिया गया है।
परिवहन विभाग ने इन रूटों पर बस सेवाएं चलाने के लिए 8 फरवरी 2026 तक आवेदन मांगे हैं। इन रूटों पर अब 18 से 42 सीटर निजी बसें चलाई जा सकेंगी। मौजूदा ऑपरेटरों के साथ-साथ नए आवेदक भी आवेदन कर सकते हैं।
प्रदेश में पहले भी कई रूट घाटे का हवाला देकर निजी हाथों में सौंपे जा चुके हैं। अब सिरमौर में 15 रूट एक साथ सरेंडर होना इस बात की ओर इशारा कर रहा है कि सरकार धीरे-धीरे HRTC के दायरे को सीमित कर रही है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह अस्थायी प्रबंधन है या फिर सरकारी परिवहन व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से पीछे धकेलने की रणनीति?
इन 15 रूटों में सबसे ज्यादा चर्चा नाहन-बनोग-धारक्यारी-जाबल का बाग-आर्मी कैंट होकर वापस नाहन आने वाले नए प्रस्तावित रूट को लेकर है। मझोली गांव से आर्मी एरिया तक सड़क लंबे समय से स्थानीय लोगों की मांग रही है। सड़क निर्माण को मंजूरी मिल चुकी है और टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई है।
इसी को देखते हुए परिवहन विभाग ने पहले ही इस रूट पर बस सेवा का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता ई. आलोक जनवेजा के अनुसार सड़क बनने के बाद आसपास के गांवों को परिवहन और विकास दोनों स्तर पर बड़ा लाभ मिलेगा।
सरेंडर किए जा रहे रूटों में नाहन, पांवटा साहिब, ददाहू, सराहां, संगड़ाह, कालाअंब, श्री रेणुका जी, गुमटी, किल्लोड़ सहित कई ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्र शामिल हैं। प्रमुख रूटों में नाहन-मातर भेडों, ददाहू-संगड़ाह, सराहां-सोलन, पांवटा साहिब-नाहन, नाहन सिटी सर्कुलर, ददाहू-पांवटा साहिब, सराहां-डागलगाघाट, नाहन-गुमटी वाया कालाअंब शामिल हैं।
HRTC और परिवहन विभाग का कहना है कि निजी भागीदारी से बस सेवाएं अधिक नियमित और व्यवस्थित होंगी और निगम पर वित्तीय बोझ कम पड़ेगा। RTO सिरमौर सोना चंदेल के अनुसार आवेदन प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी और हर रूट की माइलेज, टाइमिंग और सीटिंग कैपेसिटी पहले से तय की गई है।
हालांकि जमीनी सवाल यह है कि जिन रूटों पर वर्षों तक सरकारी बसें चलीं, उन्हें एक-एक कर निजी हाथों में सौंपना क्या भविष्य में HRTC की भूमिका को और कमजोर करेगा?