#यूटिलिटी
June 30, 2025
बीजेपी ने 'वोट बैंक' के लिए महिलाओं को दी थी HRTC बसों में छूट, बंद करने की उठी मांग
निजी बस ऑपरेटरों ने सीएम को भेजा ज्ञापन
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में महिलाओं को एचआरटीसी बसों में दी जा रही 50 प्रतिशत किराया छूट पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रदेश के निजी बस ऑपरेटरों ने इस योजना को लेकर गंभीर आपत्ति जताई है और इसे आर्थिक असंतुलन की जड़ बताया है। निजी बस ऑपरेटर यूनियन ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन भेजते हुए मांग की है कि इस छूट को या तो पूरी तरह से खत्म किया जाए या फिर निजी बस ऑपरेटरों को भी इसके समतुल्य आर्थिक राहत प्रदान की जाए।
यूनियन के महासचिव रमेश कमल ने प्रेस बयान में कहा कि इस रियायत के चलते न केवल एचआरटीसी बल्कि निजी बस सेवाओं को भी घाटे का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि महिलाएं अब केवल एचआरटीसी की बसों में यात्रा करना पसंद कर रही हैं, जिससे निजी बसों में सवारी की संख्या में भारी गिरावट आई है।
रमेश कमल ने इस योजना को पूर्व भाजपा सरकार का वोट बैंक साधने वाला फैसला करार दिया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भाजपा के कार्यकाल के अंतिम नौ महीनों में लिया गया था, जब पार्टी सत्ता से बाहर होने के करीब थी। कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद भाजपा शासन के कई फैसले रद्द कर दिएए लेकिन महिलाओं को किराए में छूट देने की योजना अब भी जारी है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि छूट का वास्तविक लाभ जरूरतमंद और गरीब महिलाओं को नहीं मिल रहा है। इस योजना का सबसे अधिक लाभ वे महिलाएं उठा रही हैं जो पहले से ही सक्षम हैं। जैसे कि सरकारी या निजी संस्थानों में कार्यरत महिलाएं, जिनकी बसों में नियमित आवाजाही होती है। जबकि वास्तव में गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाएं अब भी इस सुविधा से वंचित हैं।
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यूनियन की मांग है कि यदि सरकार इस छूट को बंद नहीं करना चाहती, तो कम से कम पात्रता की एक स्पष्ट और सटीक व्यवस्था बनाई जाए। इसके तहत गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली महिलाओं को पहचानकर उन्हें विशेष छूट कार्ड जारी किया जाएए ताकि यह सुविधा केवल उन्हीं तक सीमित रहे।
इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि यदि सरकार इस छूट व्यवस्था को यथावत बनाए रखना चाहती है, तो निजी बस ऑपरेटरों को भी अनुदान या राहत पैकेज प्रदान किया जाए, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में भी संतुलन बना रहे।