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September 14, 2025
हिमाचल: बोलकर नहीं चलेगा काम, वसीयत लिखने से ही आपके बच्चों को मिलेगा उनका हक
गवाहों के बिना पूरी नहीं होती विल की रजिस्ट्री
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शिमला। जब किसी की मौत हो जाती है तो सब उसकी वसीयत को ढूंढने लगते हैं। इसी वसीयत को अंग्रेजी में विल कहते हैं। ये डॉक्यूमेंट बहुत जरूरी होता है। वसीयत वो लीगल डॉक्यूमेंट है जिसमें कोई व्यक्ति ये तय कर लेता है कि उसकी मृत्यु के बादी उसकी संपत्ति किसे और कैसे मिलेगी।
हर इंसान मेहनत करता है, अपनी पूरी जिंदगी में काम कर एक पूंजी इकट्ठा करता है लेकिन फिर एक समय आता है जब वो अपने प्राण त्यागने की ओर बढ़ता है, तब वो तय करता है कि उसे ये पूंजी किसे देनी है और तब वो लिखता है अपनी वसीयत यानी विल।
आप अपने दिमाग में जितना मर्जी सोच लें कि आप किसे क्या देंगे लेकिन जब तक आप उसे लीगल कागजों में नहीं लिखते, तब तक आपके विचार मान्य नहीं होते। जब आपके बोले गए शब्द और विचार लिख दिए जाते हैं तो वो विल बन जाती है।
विल से परिवार में झगड़े नहीं होते, संपत्ति विवाद या कानूनी परेशानियां नहीं झेलनी पड़ती। विल बनाने वाले व्यक्ति को वसीयतकर्ता यानी Testator बोला जाता है और जिसे संपत्ति दी जाती है उसे लाभार्थी यानी Beneficiary कहते हैं।
सबसे पहले वसीयत का ड्राफ्ट बनता है। ये नॉर्मल पेपर भी बनाया जा सकता है। इस हाथ से लिखना होता है या टाइप भी किया जा सकता है। इसमें वसीयतकर्ता का नाम, पता, उम्र और ये लिखा जाता है कि वे मेंटली हेल्दी हैं और अपनी इच्छा से विल बना रहे हैं।
इसके बाद संपत्ति और लाभार्थियों के बारे में लिखा जाता है जैसे किन लोगों को आप क्या-क्या देना चाहते हैं। वसीयत में गवाहों यानी विटनेस के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। इसके लिए दो लोगों की गवाही लगती है। गवाहों को वसीयतकर्ता के सामने डॉक्यूमेंट पर साइन करना होता है। अब तैयार वसीयत की कॉपी घर पर, बैंक लॉकर में या किसी वकील के पास भी रख सकते हैं। चाहें तो इसकी एक सॉफ्ट कॉपी भी बनाई जा सकती है।
सबसे पहले जहां वसीयतकर्ता की संपत्ति स्थित है, वहां के नजदीकी सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में जाएं। वसीयत रजिस्ट्रेशन कराने के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट जैसे वसीयत की ओरिजिनल कॉपी, वसीयतकर्ता का पहचान पत्र और दोनों गवाहों के पहचान पत्र, वसीयतकर्ता और दोनों गवाहों को रजिस्ट्रार के सामने वसीयत पर साइन करना होता है।
राज्य के अनुसार रजिस्ट्रेशन फीस अलग-अलग हो सकती है। आमतौर पर ये ₹200 से 1000 तक हो सकती है। सारे डॉक्यूमेंट और प्रोसेस पूरा होने के बाद आपकी वसीयत ऑफिशियली रजिस्टर्ड हो जाएगी।