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February 28, 2025
ये क्या गजब ! तीन दिन पहले जो हिमाचल सूखा था, वहां अब बर्फ और बाढ़, जानें वजह
ऊंचे पहाड़ों पर अब इसलिए ज्यादा है एवलांच का खतरा
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शिमला। महज 3 दिन पहले ही हिमाचल प्रदेश में सूखे को लेकर चिंता जताई जा रही थी। लेकिन कुदरत भी क्या गजब खेल दिखाती है। राज्य के जो इलाके कल तक सूखे की चपेट में थे, आज वहां भारी बर्फबारी और बाढ़ का आलम है। मौसम विभाग के अनुसार, यह हालात पश्चिमी विक्षोभ के कारण पैदा हुए। अब पश्चिमी विक्षोभ वापस लौट रहा है, लेकिन पुरानी बर्फ के पिघलने और नई बर्फ के उसकी चपेट में आने से ऊंचे पहाड़ों में एवलांच का खतरा बढ़ गया है।
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पिछले 24 घंटों में किन्नौर के कल्पा में 46 सेंटीमीटर, कोठी में 120, खदराला 115, कोकसर 112, केलांग में 75 और कुकुमसेरी में 38 सेंटीमीटर बर्फबारी दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने लाहौल स्पीति, किन्नौर, चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। एक ओर जहां कांगड़ा जिले में बादल फटने और भारी बारिश के कारण अचानक बाढ़ आ गई। वहीं, लाहौल के तिंदी में और किन्नौर के जंगी नाला में भारी हिमस्खलन हुआ है।
कांगड़ा जिले के छोटा भंगाल घाटी में स्थित लुवाई गांव में मलबे में चार वाहन दब गए, जबकि 14 घर और एक स्थानीय मिडिल स्कूल की इमारत बुरी तरह प्रभावित हुई। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ के लौटने से आने वाले दिनों में मौसम साफ रहने की संभावना है। जिन क्षेत्रों में ज्यादा बर्फबारी हुई है, उन क्षेत्रों में हिमस्खलन की घटनाओं में वृद्धि हो सकती है। ऐसे में इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
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मौसम में आए अचानक इस बदलाव से जहां बागवानी और कृषि क्षेत्र को संजीवनी मिली है वहीं इससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। कुल्लू जिला के संपर्क मार्ग बाधित हैं और जिला प्रशासन ने लोगों को नदी नालों से दूर रहने की एडवायजरी जारी की है। लाहौल-स्पीति जिला के कई क्षेत्रों में कई घंटों से बिजली आपूर्ति ठप्प है जिसके चलते लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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दिसंबर व जनवरी माह में जो बर्फ पड़ती है वह लंबे समय तक जमी रहती है। लेकिन इस बार दिसंबर में बहुत कम बर्फबारी हुई थी और जनवरी व फरवरी माह भी बर्फ नहीं पड़ी थी। इसलिए धीरे-धीरे तापमान बढ़ा और मौसम गर्म हो गया।
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पश्चिमी विक्षोभ के कारण 26 फरवरी की शाम से जैसे ही बर्फबारी शुरू हुई तो पुरानी व ताजा बर्फ के बीच तापमान में अंतर के कारण ऊपरी बर्फ पिघलकर पानी बन गई। इससे मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा बन गया। वहीं, पुरानी व ताजा बर्फ के बीच इक्कठा हुए पानी से ऊपरी बर्फ फिसलने लगी है, जिसकी चपेट में ठोस हो चुकी पुरानी बर्फ भी आ जाती है और यही हिमस्खलन का रूप ले रही है।