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April 27, 2026
हिमाचल में बारिश की दस्तक: एक हफ्ते तक कूल-कूल रहेगा मौसम, ओलावृष्टि का भी अलर्ट
भयानक गर्मी के बीच बारिश और बर्फबारी की चेतावनी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में इन दिनों मौसम ने पूरी तरह से करवट ले ली है। जहां एक तरफ प्रदेश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी पड़ रही है और तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ अब मौसम विभाग ने लोगों को बड़ी राहत के साथ-साथ सतर्क रहने की चेतावनी भी दी है।
बता दें कि प्रदेश के दो जिलों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच गया है, जिससे लोगों को तेज धूप और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ रहा है। खासकर मैदानी और निचले इलाकों में गर्मी का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है। दिन के समय सड़कें सुनसान नजर आ रही हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं।
इसी बीच मौसम विभाग ने राहत की खबर देते हुए बताया है कि आने वाले दिनों में मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार 27 अप्रैल से लेकर 3 मई 2026 तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान हल्की से मध्यम बारिश, बर्फबारी, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि देखने को मिल सकती है।
मौसम विभाग ने इस दौरान ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है, खासकर उन दिनों के लिए जब मौसम ज्यादा खराब रहने की संभावना है। विभाग का कहना है कि 28, 29 और 30 अप्रैल के साथ-साथ 3 मई को कई स्थानों पर बारिश और बर्फबारी हो सकती है। वहीं 27 अप्रैल, 1 मई और 2 मई को कुछ इलाकों में हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना जताई गई है।
मौसम विभाग ने यह भी साफ किया है कि अगले 24 घंटों के दौरान तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, लेकिन इसके बाद अगले 3 से 4 दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे ठंडक फिर से महसूस होने लगेगी।
इस बीच सोमवार को प्रदेश में मौसम साफ बना रहा और तेज धूप ने लोगों को परेशान किया। सिरमौर के पांवटा साहिब में अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे ज्यादा तापमान माना जा रहा है। इससे पहले ऊना में भी 41.8 डिग्री तापमान दर्ज किया गया था।
अन्य जिलों की बात करें तो ऊना में 41.8, बिलासपुर में 37.5, कांगड़ा में 36.6, मंडी में 36.0, धर्मशाला में 34.1 और शिमला में 27.2 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया है। पिछले सप्ताह कुल्लू जिले में भारी ओलावृष्टि हुई थी, जिससे सेब और अन्य बागवानी फसलों को काफी नुकसान पहुंचा था। अब फिर से मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए किसानों और बागवानों की चिंता बढ़ गई है।