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November 3, 2025
हिमाचल: अब आलू बीजने को नहीं जोतना पड़ेगा खेत, जमीन के ऊपर रखने से उगेगी फसल
आलू की नई किस्म नीलकंठ का सफलतापूर्वक ट्रायल
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सिरमौर। क्या आप आलू की खेती करते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है। आपको ये जानकर खुशी होगी कि कृषि वैज्ञानिकों ने आलू उगाने के लिए नई तकनीक खोज ली है। आपको ये जानकर और खुशी होगी कि इस तकनीक के जरिए ना तो आपको खेत को जोतने की जरूरत है और ना ही सिंचाई की।
गौरतलब है कि कृषि विज्ञान केंद्र ने आलू की नई किस्म नीलकंठ का सफलतापूर्वक ट्रायल किया है। ऊना और सिरमौर जिलों में इस साल इस फसल को बड़े पैमाने पर लगाने को लेकर भी काम हो रहा है।
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आलू की इस किस्म की बिजाई करने के लिए खेतों की जुताई की जरूरत नहीं होती। धान की फसल की कटाई के बाद किसान इस फसल के बीज को सीधे खेत में रख सकते हैं। बीज को खेत में रखने के बाद आता है पराली का रोल।
बीज को अब पराली से ढका जाता है। जब फसल तैयार होती है तो फसल की खोदाई का खर्च भी बचता है। पराली हटाने के बाद आलू की फसल को सीधे उठाया जा सकता है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि भरपूर पौष्टिक तत्व होने के चलते ये किस्म दिल के मरीजों के लिए फायदेमंद है। सिरमौर जिले में पहली बार कृषि विज्ञान केंद्र इस फसल को बढ़ावा देने को लेकर काम कर रहा है।
पांवटा साहिब व नाहन के तहत आने वाले क्षेत्रों में एक दर्जन किसानों को बीज वितरित कर नई विधि से तैयार करने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए ऊना और सिरमौर जिले को इस बार चयनित किया गया है।
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बीते साल ऊना और धौलाकुओं के विज्ञान केन्द्रों में ट्रायल पर इस किस्म का उत्पादन किया गया था। इसके अच्छे परिणाम मिलने से अब बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है।
इसके लिए आत्मा प्रोजेक्ट के सहयोग से प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों का चयन कर बीज वितरित किया गया है। गौरतलब है कि सिरमौर में पहली बार इस किस्म के आलू की फसल तैयार होगी। बता दें कि अक्टूबर-नवंबर में बिजाई के बाद फरवरी में फसल तैयार हो जाती है।