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February 22, 2026
मंत्री विक्रमादित्य के विभाग की नई पॉलिसी: बारिश-बर्फबारी से भी नहीं खराब होगी सड़कें, जानें क्या है प्लान
40 हजार किमी सड़क नेटवर्क के लिए नई व्यवस्था
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बरसात- बर्फबारी के कारण कई सड़कें खराब हो जाती है। हर मानसून वही तस्वीर देखने को मिलती है,कहीं सड़क धंस जाती है, कहीं डामर बह जाता है, तो कहीं पूरी पटरी उखड़कर खाई में समा जाती है। बर्फबारी के बाद भी दरारें चौड़ी हैं और गड्ढे गहरे दिखाई पड़ते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सड़कों पर बहता अनियंत्रित पानी और कमजोर जल निकासी व्यवस्था इस नुकसान की सबसे बड़ी वजह रही है। अब राज्य सरकार ने इसी मूल समस्या पर चोट करते हुए नई रोड ड्रेनेज पॉलिसी को मंजूरी दी है।
सरकार का कहना है कि पहाड़ी भू-भाग में सड़कें जीवनरेखा हैं। गांवों से जिला मुख्यालयों तक आवागमन, व्यापार और पर्यटन इन्हीं पर निर्भर है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के मार्गदर्शन में तैयार की गई
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‘रोड ड्रेनेज पॉलिसी’ में हाइड्रोलॉजी आधारित डिजाइन को केंद्र में रखा गया है। अब ड्रेनेज संरचनाएं वास्तविक वर्षा तीव्रता और जलग्रहण क्षेत्र के वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर डिजाइन होंगी।
प्रदेश में लोक निर्माण विभाग 40 हजार किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क का रखरखाव करता है। क्षेत्रीय निरीक्षणों में सामने आया कि अपर्याप्त ड्रेनेज और भूस्खलन के कारण भारी क्षति होती है। वर्ष 2023 और 2025 में सड़कों को क्रमशः लगभग 2400 करोड़ और 3000 करोड़ रुपये का अनुमानित नुकसान हुआ। हर साल मरम्मत पर भारी खर्च भी इसी वजह से बढ़ता है।
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नई नीति के तहत सभी नई सड़क परियोजनाओं में बॉक्स कल्वर्ट को डिफॉल्ट ड्रेनेज संरचना के रूप में अपनाया जाएगा, ताकि जलभराव कम हो और सफाई मशीनों से आसान हो।
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पहाड़ी ढलानों की मजबूती, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में निवारण उपाय और रिसाव क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा प्रावधान अनिवार्य होंगे। आबादी वाले क्षेत्रों में ऊंचे कर्ब, इनलेट ओपनिंग और बेहतर रिफ्लेक्टर लगाए जाएंगे ताकि जल प्रवाह और यातायात दोनों सुरक्षित रहें।
नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। आर्थिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जिलों की मुख्य सड़कों को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि हर मौसम में संपर्क सुविधा बनी रहे।
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सरकार का दावा है कि यह कदम मानसून और बर्फबारी से होने वाली वार्षिक क्षति को कम करेगा, सड़क नेटवर्क को अधिक लचीला बनाएगा और लोगों को सुरक्षित सफर का भरोसा देगा।