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August 7, 2025
हिमाचल: टांडा अस्पताल की अब घर बैठे बनेगी पर्ची, लंबी लाइन में लगने से मिलेगा छुटकारा
लोग अब घर बैठे मोबाइल एप से बना सकेंगे डॉक्टर की पर्ची
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला में स्थित जिला के सबसे बड़े अस्पताल डॉ राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज टांडा ने लोगों को बड़ी सुविधा की सौगात दे दी है। अकसर इलाज करवाने आने वालों को पहले घंटों लाइन में लग कर पर्ची बनवानी पड़ती थी, लेकिन अब इससे छुटकारा मिल जाएगा। टांडा में इलाज करवाने आने वाले मरीज अब घर बैठे ही पर्ची बना सकेंगे। जिससे उन्हें डॉक्टर के पास पहुंचने से पहले घंटों पर्ची के लिए लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।
दरअसल डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल टांडा में मरीजों को अब पर्ची बनवाने के लिए लंबी कतारों में घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मरीज अब घर बैठे अपने मोबाइल फोन के माध्यम से ओपीडी पर्ची बना सकेंगे। इस नई सुविधा की शुरुआत तीन विभागों मेडिसिन, शिशु रोग और त्वचा रोग में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर की गई है।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सुगम स्वास्थ्य मोबाइल एप के माध्यम से यह सुविधा आरंभ की है। मरीज एप पर रजिस्ट्रेशन कर अपना ओपीडी टिकट बनवा सकते हैं, जिसमें टोकन नंबर और जांच का कमरा नंबर भी शामिल होगा। इससे ओपीडी प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी और कतारों में लगने वाली भीड़ को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा।
टांडा मेडिकल कॉलेज में कांगड़ा ही नहीं, बल्कि चंबा, मंडी, कुल्लू, लाहौल-स्पीति, हमीरपुर, ऊना और बिलासपुर जिलों से भी बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए आते हैं। सप्ताह के पहले तीन दिन अस्पताल में सबसे अधिक भीड़ रहती है। अब ऑनलाइन पर्ची सुविधा शुरू होने से मरीज अपनी बारी तय समय के अनुसार ले सकेंगे और बेवजह समय बर्बाद नहीं होगा।
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पहले अस्पताल में यह शिकायत आम थी कि जो मरीज पहले पर्ची बनवाते थे, उन्हें भी देर से नंबर मिलता था। अब ऑनलाइन टोकन आधारित सिस्टम के कारण यह समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। पहले आए, पहले पाए की प्रणाली अब डिजिटल और पारदर्शी हो चुकी है। ऐसे में अब लोग घर बैठ कर अपनी पर्ची बनाएंगे और डॉक्टर से मिल सकेंगे। इसके लिए उन्हें ना तो पर्ची की लंबी लाइन में लगना पड़ेगा और ना ही ओपीडी के बाहर घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ेगा।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने बताया कि यह प्रणाली अभी तीन विभागों में लागू की गई है, लेकिन चरणबद्ध तरीके से इसे अन्य सभी विभागों में भी विस्तारित किया जाएगा। इससे न केवल मरीजों को सुविधा होगी बल्कि पर्ची काउंटर पर स्टाफ का बोझ भी कम होगा।
मेडिकल कॉलेज टांडा के प्राचार्य डॉ मिलाप शर्मा ने कहा कि हम डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह पायलट प्रोजेक्ट मरीजों को लंबी कतारों से राहत देने के लिए शुरू किया गया है। इसकी सफलता के बाद अन्य विभागों में भी इसे लागू किया जाएगा, ताकि हर मरीज को सुविधाजनक और व्यवस्थित सेवाएं मिल सकें। टांडा मेडिकल कॉलेज की यह पहल हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। अब मरीजों को न केवल सुविधा मिलेगी, बल्कि उनके कीमती समय की भी बचत होगी।