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August 3, 2025

सावधान हिमाचल: खतरे के निशान पर पौंग बांध का जलस्तर, कभी भी छोड़ा जा सकता है पानी; अलर्ट पर कई गांव

पिछले साल पौंग बांध से छोड़े पानी ने 60 से अधिक गांवों में मचाई थी तबाही

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Pong Dam Water Level

जवाली (कांगड़ा)। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश अब जनजीवन पर कहर बनकर टूट रही है। जहां एक ओर राज्य के कई हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन से तबाही मची हुई है, वहीं अब कांगड़ा जिला भी गंभीर खतरे की ओर बढ़ रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण बन रहा है पौंग बांध, जिसका जलस्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच चुका है। जलप्रवाह की लगातार बढ़ती गति ने प्रशासन और आम जनता की चिंता बढ़ा दी है।

पौंग बांध का जलस्तर 1365.26 फीट पर पहुंचा

रविवार को प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार पौंग बांध का जलस्तर 1365.26 फीट दर्ज किया गया है। यह खतरे के निशान 1380 फीट से मात्र कुछ ही कदम दूर है। बीते 24 घंटों में जलस्तर में लगभग 5 फीट की तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो इस बात का संकेत है कि यदि बारिश का यही सिलसिला अगले दो दिनों तक जारी रहा, तो फ्लड गेट खोलने की नौबत आ सकती है।

 

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बांध में भारी जलप्रवाह, कभी भी खुल सकते हैं फ्लड गेट

वर्तमान में बांध में 125099 क्यूसेक पानी की आमद हो रही है, जबकि 16500 क्यूसेक पानी को 6 टरबाइनों के माध्यम से बाहर छोड़ा जा रहा है। टरबाइनों के जरिये यह पानी ब्यास नदी और शाह नहर विराज में प्रवाहित हो रहा है। बांध प्रबंधन ने चेताया है कि यदि जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो अगले 48 घंटों के भीतर फ्लड गेट खोलने की मजबूरी हो सकती है।

निचले इलाकों को किया जा रहा अलर्ट

जिला प्रशासन ने पौंग बांध से सटे क्षेत्रों  मण्ड, म्यानी, इंदौरा, रे और फतेहपुर को अर्ली वार्निंग सिस्टम के तहत सतर्क किया है। लोगों को ब्यास नदी, सहायक नदियों, खड्डों और नालों के किनारे जाने से मना किया गया है। राहत और बचाव कार्य के लिए स्वयंसेवकों की टीमों का गठन किया गया है। साथ ही स्थानीय मछुआरों और गोताखोरों को किश्तियों सहित तैनात कर दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता दी जा सके।

 

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बीबीएमबी को निर्देश, धीरे-धीरे छोड़ा जाए पानी 

एसडीएम फतेहपुर विश्रुत भारती ने बताया कि बीबीएमबी (भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड) को निर्देश दिए गए हैं कि पानी धीरे.धीरे छोड़ा जाए, ताकि निचले क्षेत्रों में रह रहे लोगों की संपत्ति और फसलें प्रभावित न हों। कांगड़ा, होशियारपुर, दसूहा, मुकेरियां, और इंदौरा के प्रशासनिक अधिकारियों को भी लिखित सूचना भेजी गई है कि कभी भी बांध से पानी छोड़ा जा सकता है।

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पिछले साल ब्यास नदी ने मचाई थी तबाही

2024 में भी ऐसी ही स्थिति सामने आई थी, जब भारी बारिश के बाद पौंग बांध से छोड़े गए पानी ने निचले क्षेत्रों में तबाही मचा दी थी। रे, बडुखर, मंड, इंदौरा और डमटाल जैसे क्षेत्रों के 60 से अधिक गांव बाढ़ से प्रभावित हुए थे। उस दौरान कई घर पानी में डूब गए थे। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए इंडियन एयरफोर्स की मदद लेनी पड़ी थी। एयरफोर्स ने करीब 2700 लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया था। इस दौरान कई मवेशी बह गए थे और हजारों लोग बेघर हो गए थे।

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