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July 21, 2025

हिमाचल: पुल पर से गुजर रही थी यात्रियों से भरी ट्रेन; नीचे नींव का हिस्सा खड्ड में समाया

तीन राज्यों की रेल सीमा को जोड़ता है यह पुल

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Railway Bridge

डमटाल/कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब सिर्फ सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका गंभीर प्रभाव रेल नेटवर्क पर भी साफ नजर आने लगा है। कांगड़ा जिले की सीमा से सटे चक्की दरिया में आई बाढ़ ने न सिर्फ क्षेत्र की संपर्क सड़कों को भारी नुकसान पहुंचाया, बल्कि जम्मूदृदिल्ली रेलमार्ग पर स्थित ढांगू माजरा रेलवे पुल की नींव को भी गहरी चोट दी है। यह पुल उत्तर भारत के तीन राज्यों हिमाचल प्रदेश, पंजाब और जम्मू.कश्मीर को जोड़ने वाला एक प्रमुख रेलवे संपर्क है।

हिमाचल पंजाब सीमा पर बना है यह पुल

दरअसल चक्की दरिया में अचानक आई भीषण बाढ़ के चलते पुल की अप्रोच दीवार एप्रोच स्ट्रक्चर का एक बड़ा हिस्सा दरिया में समा गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि हादसे के वक्त पुल से एक यात्री ट्रेन गुजर रही थी, जिसमें हजारों लोग सवार थे। यदि ट्रेन कुछ देर और पुल पर रुक जाती या बहाव अधिक तेज होता, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। गनीमत रही कि ट्रेन धीरे.धीरे पुल पार कर गई और सभी यात्री सुरक्षित निकल गए।

 

 

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क्या बोले रेल मंडल प्रबंधक

रेल मंडल प्रबंधक विवेक कुमार ने बताया कि रेलवे विभाग स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है और पुल की मरम्मत का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ठेकेदार को कार्य सौंपा जा चुका है। अगस्त तक इस पुल की मरम्मत पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि फिलहाल रेल सेवाएं जारी हैं, लेकिन अगर हालात और बिगड़ते हैं तो सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है।

 

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बाढ़ से सड़क नेटवर्क भी टूटा

रेल पुल की समस्या के साथ.साथ माजरा क्षेत्र की मुख्य संपर्क सड़कें भी बाढ़ की चपेट में हैं। माजरा से एयरपोर्ट की ओर जाने वाली सड़क की अप्रोच दीवार और डंगे तेज बहाव में बह गए हैं, जिससे कई पंचायतों जैसे सीरत, मोटली और डमटाल का बाहरी दुनिया से संपर्क टूटने की कगार पर है। यदि जल्द मरम्मत कार्य नहीं हुआ तो माजरा गांव और एयरपोर्ट का संपर्क हिमाचल और पठानकोट से पूरी तरह कट सकता है।

 

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स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र को ऐसे हालातों का सामना करना पड़ा है। पिछले वर्ष भी इसी स्थान पर बाढ़ के चलते सड़क कई महीनों तक बहाल नहीं हो सकी थी। उस समय चार महीने तक माजरा क्षेत्र पूरी तरह से अलग.थलग हो गया था।

राजनीतिक उपेक्षा पर भी उठे सवाल

क्षेत्रीय जनता का आरोप है कि चार पंचायतों को प्रभावित करने वाली इस गंभीर समस्या पर न तो सरकार और न ही विपक्ष की ओर से कोई ठोस कार्रवाई की गई है। डंगे और क्रेट पूरी तरह से बह चुके हैंए लेकिन उनकी मरम्मत की कोई योजना ज़मीन पर नहीं दिख रही। रेलवे विभाग के अनुसार प्रतिदिन इस रूट से 90 से अधिक ट्रेनों की आवाजाही होती है। हालांकि फिलहाल मुख्य पुल को कोई सीधा खतरा नहीं है, लेकिन अप्रोच की क्षति के कारण यह स्थिति किसी भी समय गंभीर रूप ले सकती है।

 

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