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June 23, 2026

हिमाचल हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, इन पूर्व कर्मचारियों को भी मिलेगा ओपीएस का लाभ

हिमाचल हाईकोर्ट ने नहीं मानी सुक्खू सरकार की दलील

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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सूबे के पूर्व कर्मचारियों के हक में एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत के इस मील के पत्थर साबित होने वाले निर्णय से उन हजारों कर्मचारियों के चेहरों पर खुशी लौट आई है, जो लंबे समय से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे। माननीय उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि इन कर्मचारियों को भी मिलेगा ओपीएस (OPS) का लाभ मिलेगा भले ही उनका नियमितीकरण सरकार की कट-ऑफ डेट के बाद हुआ हो।

 

न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने मामले की गंभीरता को समझते हुए राज्य के वित्त विभाग द्वारा साल 2019 में जारी किए गए उस विवादित आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है, जिसके तहत इन कर्मचारियों की पेंशन पर रोक लगा दी गई थी।

 

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क्या है हाईकोर्ट का वो बड़ा फैसला?

न्यायालय ने अपने आदेश में साफ किया कि यदि किसी भी सरकारी कर्मचारी को 15 मई 2003 से पहले वर्कचार्ज (Work-Charge) स्टेटस मिल चुका था, तो वह कर्मचारी हर हाल में वर्ष 1972 के नियमों के तहत पुरानी पेंशन और सेवानिवृत्ति के तमाम लाभों का हकदार माना जाएगा। अदालत ने जोर देकर कहा कि इसके लिए कर्मचारी का नियमितीकरण (Regularization) कब हुआ, यह मायने नहीं रखता। यदि वर्कचार्ज स्टेटस कट-ऑफ तारीख से पहले का है, तो ओपीएस का लाभ रोकना सरासर गलत है।

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हाईकोर्ट ने नहीं मानी सरकार की दलील

इस मामले में राज्य सरकार और वन विभाग ने कोर्ट में तर्क दिया था कि याचिकाकर्ता साल 2007 में नियमित हुए थे। सरकार का कहना था कि चूंकि इनका नियमितीकरण 15 मई 2003 (जिस दिन प्रदेश में ओपीएस बंद कर नई पेंशन स्कीम लागू हुई थी) के बाद हुआ है, इसलिए ये राज्य सरकार के पूर्ण कर्मचारी कट-ऑफ डेट के बाद बने और ओपीएस के हकदार नहीं हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को पूरी तरह से खारिज करते हुए कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया।

वन विभाग के डेली वेजर्स की कानूनन जीत

यह पूरा मामला वन विभाग में तैनात रहे दो कर्मचारियों से जुड़ा है। इन्हें क्रमशः साल 1991 और 1993 में दैनिक वेतन भोगी (Daily Wager) के रूप में नियुक्त किया गया था। इसके बाद विभाग ने उनकी सेवाओं को देखते हुए अप्रैल 2001 और फरवरी 2003 में वर्कचार्ज स्टेटस दे दिया था, जबकि उनका नियमितीकरण साल 2007 में हुआ। अदालत ने स्पष्ट किया कि पेंशन की गणना के लिए वर्कचार्ज की अवधि को नियमित सेवा के साथ ही जोड़ा जाता है, इसलिए इन्हें ओपीएस से वंचित नहीं किया जा सकता।

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सरकार को ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट जारी करने के निर्देश

अदालत का कड़ा रुख: हाईकोर्ट ने न केवल वित्त विभाग के 2019 के पेंशन रोकने वाले आदेश को कूड़ेदान में डाल दिया, बल्कि प्रतिवादी राज्य सरकार और वन विभाग को सख्त निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ताओं को पुरानी पेंशन योजना (OPS) के साथ-साथ उनकी ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट (छुट्टियों के बदले नकद भुगतान) के तमाम वित्तीय लाभ तुरंत जारी किए जाएं।

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