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June 23, 2026
राजा साहब 'वीर' भी थे 'भद्र' भी : कुछ ऐसी उपलब्धियां और काम जिसके लिए हमेशा किए जाएंगे याद
राजा साहब राजनीति को सेवा मानते थे, सौदा नहीं।
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाले और छह बार मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की आज 23 जून को जन्म जयंती मनाई जा रही है। प्रदेशभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं, समर्थकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके योगदान को याद किया जा रहा है।
अपने पांच दशक से अधिक लंबे राजनीतिक जीवन में वीरभद्र सिंह ने हिमाचल के विकास, ग्रामीण क्षेत्रों के उत्थान और जनकल्याणकारी नीतियों के माध्यम से ऐसी छाप छोड़ी, जिसके कारण उन्हें आज भी प्रदेश की राजनीति का एक प्रभावशाली और लोकप्रिय जननेता माना जाता है।
IGMC शिमला में लंबी बीमारी के बाद उन्होंने 8 जुलाई 2021 को तड़के अंतिम सांस ली। उन्हें दिल का दौरा पड़ने के बाद वेंटीलेटर पर रखा गया था, लेकिन किस्मत ने एक पूरा युग हमसे छीन लिया।
वीरभद्र सिंह कहते थे — “मैं थोक का व्यापारी हूं शिक्षा का।” उन्होंने हजारों स्कूल और कॉलेज गांव-गांव में खोले, खासकर दुर्गम क्षेत्रों की लड़कियों के लिए शत-प्रतिशत पहुंच सुनिश्चित की।
उनके समय में हिमाचल में नौकरियों के पिटारे खुले। हज़ारों बेरोज़गार युवाओं को सरकारी विभागों में नौकरी मिली।
जरूरतमंदों को अपनी जेब से मदद देते — कभी किराया, कभी बेटी के विवाह के लिए शगुन। उनका दरबार जनसेवा का असली केंद्र था।
वे कहते थे — “मेरे मुंह से निकला हर शब्द आदेश है।” अफसरों में उनके लिए विशेष सम्मान और अनुशासन का भाव था।
डोडरा-क्वार, पांगी, किन्नौर, लाहौल-स्पीति तक सड़कें पहुंचीं। उन्होंने भौगोलिक दूरी नहीं, बल्कि संवेदनशीलता से शासन चलाया।
पड़ोसी राज्यों और केंद्र से हिमाचल के हक के लिए पूरी ताकत से लड़ते रहे — चाहे पानी का मसला हो या बिजली परियोजनाएं।
विधानसभा का सत्र पहली बार धर्मशाला में शुरू कर क्षेत्रीय संतुलन की नीति अपनाई।
अटल टनल की फाइलें उनकी मेज पर भी गंभीरता से चलीं। IIT, Central University, Law University के लिए उन्होंने जमीन तैयार की।
राजनीति को सेवा मानते थे, सौदा नहीं। पूरी जिंदगी विधायक रहे लेकिन वेतन नहीं लिया।