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November 27, 2025

हिमाचल सरकार HRTC की 'खटारा' बसों को करेगी "टाटा बाय-बाय", नई बसें होंगी बेड़े में शामिल

कबाड़ में जाएंगी उम्र पूरी कर चुकी एचआरटीसी की पुरानी बसें

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HRTC Bus

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सड़कों पर अब आपको हिचकोले खिलाने वाली पुरानी और खस्ताहाल बसें नजर नहीं आएंगी। हिमाचल पथ परिवहन निगम HRTC ने यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को देखते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। निगम अपने बेड़े से उन सभी बसों को बाहर का रास्ता दिखा रहा है, जिनकी उम्र पूरी हो चुकी है।

सड़कों से हटाई गईं 15 साल पुरानी बसें

HRTC ने प्रदेश भर में ऐसी बसों की सूची तैयार कर ली है जो 15 साल पुरानी हो चुकी हैं या जिनकी हालत अब सड़क पर चलने लायक नहीं बची है। इन 'खटारा' हो चुकी बसों को स्क्रैप (कबाड़) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। फिलहाल, इन बसों को रूट्स से हटाकर खड़ा कर दिया गया है ताकि कोई पुरानी बस सड़क पर न दौड़े। हालांकि, बसें कम होने से निगम को थोड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन यात्रियों की सेवा बाधित न हो, इसके लिए वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं।

 

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दिसंबर में आएंगी नई चमचमाती इलेक्ट्रिक बसें

पुरानी बसों के जाने से जो खालीपन आया है, वह जल्द ही भरने वाला है। यात्रियों के लिए अच्छी खबर यह है कि दिसंबर महीने में HRTC के बेड़े में नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल होने जा रही हैं। इन नई बसों के आने से न सिर्फ स्क्रैप हुई बसों की कमी पूरी होगी, बल्कि यात्रियों का सफर भी पहले से ज्यादा आरामदायक और प्रदूषण मुक्त होगा।

 

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कबाड़ से करोड़ों कमाने में HRTC सबसे आगे

आपको जानकर हैरानी होगी कि पुरानी गाड़ियां स्क्रैप करने में HRTC देश में अग्रणी है। वर्ष 2023 में भी निगम ने स्क्रैप पॉलिसी के तहत शानदार काम किया था। तब HRTC ने 124 पुरानी बसों, ट्रकों और अन्य वाहनों की ऑनलाइन नीलामी करके 2.84 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कमाई की थी। इसके अलावा, पुराने टायरों और ट्यूबों को बेचकर भी निगम ने डेढ़ करोड़ रुपये से ज्यादा जुटाए थे। अब एक बार फिर निगम इसी पॉलिसी के तहत अपना बेड़ा अपडेट कर रहा है।

 

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'ग्रीन हिमाचल' की ओर मजबूत कदम

हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता और साफ हवा के लिए जाना जाता है। पुरानी डीजल बसें बहुत ज्यादा धुआं और प्रदूषण फैलाती हैं। इन बसों को स्क्रैप करना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम है। दिसंबर में आने वाली इलेक्ट्रिक बसें  जीरो पॉल्यूशन वाली होंगी, जिससे राज्य की आबोहवा को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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