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August 16, 2025
विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति पर राज्यपाल-सुक्खू सरकार आमने-सामने; अब हाईकोर्ट पहुंचा मामला
राजभवन और सुक्खू सरकार की खींचतान में अटकी विश्वविद्यालयों की नियुक्ति प्रक्रिया
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्ति को लेकर एक बार फिर से राज्यपाल और सरकार के बीच टकराव गहरा गया है। मामला कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर और बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी सोलन का है, जहां कुलपति पद के लिए चल रही प्रक्रिया अब विवाद का रूप ले चुकी है।
राजभवन की ओर से दोनों विश्वविद्यालयों के लिए कुलपति नियुक्ति हेतु आवेदन आमंत्रित किए गए थे। सरकार ने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए आवेदन को निरस्त कर दिया, लेकिन इसके बावजूद राजभवन ने आवेदन की तिथि आगे बढ़ा दी। इसी बीच इस पूरे विवाद पर दाखिल एक याचिका पर हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश पारित कर नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी।
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राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने "हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री संशोधन विधेयक" को विश्वविद्यालयों के हित को ध्यान में रखते हुए वापस भेजा है। उन्होंने कहा, “हाई कोर्ट का जो आदेश है उसमें हस्तक्षेप करना मेरा काम नहीं है, लेकिन जो कदम मैंने उठाया है वह प्रदेश और विश्वविद्यालयों के हित में है। अब जनता को भी सोचना चाहिए कि आखिर कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों के साथ ऐसा क्यों किया जा रहा है।”
वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बयान देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति (गवर्नर) को राज्य विधानमंडल द्वारा प्रदत्त शक्तियों के तहत सरकार के निर्देशों का पालन करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार द्वारा कुलपति नियुक्ति की अधिसूचना वापस लेने के निर्देश के बावजूद राजभवन ने आवेदन की तिथि बढ़ा दी। सीएम ने आगे कहा कि विधानसभा में कृषि और बागवानी विश्वविद्यालयों से संबंधित एक संशोधन विधेयक पारित कर राज्यपाल के पास भेजा गया था, लेकिन उस पर भी आपत्ति जता कर बिल को वापस भेज दिया गया।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि केवल यही नहीं, बल्कि कई अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी राज्यपाल की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। इनमें सुखाश्रय बिल और भ्रष्टाचार निरोधक बिल प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों पर वह जल्द ही राज्यपाल से बातचीत करेंगे ताकि समाधान निकाला जा सके।
कुलपति नियुक्ति को लेकर खींचतान ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर से तनाव बढ़ा दिया है। सरकार का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखने के लिए विधानसभा में पारित विधेयकों को लागू करना जरूरी है, जबकि राजभवन का पक्ष है कि राज्यहित में निर्णय लेना उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।