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July 21, 2026
हिमाचल के इस जिला में बिगड़े हालात: बादल फटने के बाद आया फ्लैश फ्लड, पहाड़ी से गिरी चट्टानें; NH बंद
आसमानी बिजली ने परिवार पर बरसाया कहर
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किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के जनजातीय जिला किन्नौर में मानसून अब खतरनाक रूप धारण करता नजर आ रहा है। लगातार हो रही बारिश के बीच जिले के कई हिस्सों में हालात बिगड़ने लगे हैं। सोमवार शाम मौसम ने अचानक करवट ली और पहाड़ों पर बादल फटने जैसी स्थिति बनने के बाद शलखर क्षेत्र में भीषण फ्लैश फ्लड आ गया। देखते ही देखते मलबा और तेज बहाव राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंच गया, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह थम गई। फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि मानसून के दौरान किन्नौर की संवेदनशील पहाड़ियां कितनी खतरनाक हो सकती हैं।
जानकारी के अनुसार सोमवार शाम करीब 5:50 बजे के आसपास जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तेज बारिश हुई। इसके बाद शलखर के पास अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर बहने लगा। कुछ ही मिनटों में स्थिति फ्लैश फ्लड में बदल गई और राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलबे का सैलाब आ गया। सड़क पर भारी मात्रा में पत्थर, चट्टानें और कीचड़ जमा होने से यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। स्पीति, काजा और पूह की ओर जाने वाले वाहनों के पहिये जहां के तहाँ रुक गए। कई यात्री घंटों तक सड़क खुलने का इंतजार करते रहे।
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मानसून के कहर का दूसरा बड़ा दृश्य समदो के निकट काली ढांक क्षेत्र में देखने को मिला। यहां ऊपरी पहाड़ी से अचानक विशाल चट्टानें सड़क पर आ गिरीं। चट्टानों के गिरते ही राष्ट्रीय राजमार्ग का एक हिस्सा पूरी तरह अवरुद्ध हो गया। गनीमत यह रही कि जिस समय चट्टानें गिरीं, उस दौरान कोई वाहन उनकी सीधी चपेट में नहीं आया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर वाहनों की आवाजाही रोक दी।
शलखर और समदो के बीच हुई इन घटनाओं का असर पूरे क्षेत्र में देखने को मिला। जिला मुख्यालय रिकांगपिओ से पूह, काजा और स्पीति की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग पूरी तरह प्रभावित हो गया। सड़क बंद होने से स्थानीय लोगों, पर्यटकों और मालवाहक वाहनों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कई स्थानों पर वाहन लंबी कतारों में खड़े रहे, जबकि कुछ यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रुकने की सलाह दी गई।
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सड़क बहाली के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ), जिला प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों की टीमें मौके पर तैनात हैं। जेसीबी और भारी मशीनों की मदद से मलबा हटाने तथा चट्टानों को सड़क से हटाने का काम लगातार जारी है। हालांकि लगातार खराब मौसम और पहाड़ियों से गिर रहे पत्थरों के कारण राहत एवं बहाली कार्य चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। समाचार लिखे जाने तक यातायात पूरी तरह बहाल नहीं हो पाया था।
बारिश और भूस्खलन के खतरे के चलते सांगला घाटी, भावा घाटी, रोपा घाटी, हांगरंग घाटी तथा रिकांगपिओ क्षेत्र में लोगों ने घरों में रहना ही सुरक्षित समझा है। लगातार बरसात और खराब मौसम के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ियों से लगातार छोटे-बड़े पत्थर गिर रहे हैं, जिससे यात्रा करना जोखिम भरा हो गया है।
उधर, सोलन जिले के परवाणू में भी मौसम का कहर देखने को मिला। सेक्टर-4 स्थित एक मकान पर सोमवार दोपहर आसमानी बिजली गिरने से छत में दरार पड़ गई और घर में लगे कई विद्युत उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए। बिजली गिरने के दौरान तेज धमाके की आवाज सुनाई दी, जिससे आसपास के लोग सहम गए। घटना के बाद कुछ समय के लिए इलाके की विद्युत आपूर्ति भी प्रभावित हुई।
राहत की बात यह रही कि जिस समय बिजली गिरी, उस समय घर के बाहर कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। यदि कोई बाहर होता तो गंभीर हादसा हो सकता था। बिजली विभाग के अधिकारियों ने क्षतिग्रस्त ट्रांसफार्मर को तुरंत बदलकर क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बहाल कर दी। विभाग के अनुसार फिलहाल किसी अन्य बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है।