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June 30, 2026
विक्रमादित्य के विभाग की 'गलती' से गई मेरे बेटे की जा.न, धर्मशाला हा.दसे पर परिजनों ने CM से मांगा न्याय
परिजन बोले सड़क ठीक होती तो जिंदा होता बेटा, सीएम सुक्खू ने मामले में बैठाई जांच
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश की पर्यटन राजधानी धर्मशाला के नरघोटा में हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। 24 जून की खौफनाक रात को करीब 400 मीटर गहरी खाई में कार गिरने से जान गंवाने वाले युवा अक्षय कोडा के न्याय के लिए उनके परिजनों ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का दरवाजा खटखटाया है। भावुक और आक्रोशित परिजनों ने इस खूनी हादसे के लिए किसी और को नहीं, बल्कि सीधे तौर पर हिमाचल सरकार के कद्दावर मंत्री विक्रमादित्य सिंह के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और कांगड़ा जिला प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है। परिजनों का साफ कहना है कि अगर विभाग सोया न होता, तो आज उनका बेटा जिंदा होता।
अक्षय कोडा के परिजनों ने धर्मशाला में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी और न्याय की मांग की। परिजनों ने सीधे आरोप लगाया कि यह महज एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि लोक निर्माण विभाग और जिला प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण हुई प्रशासनिक हत्या है। पिछले दो साल से यह सड़क पूरी तरह जर्जर और जानलेवा बनी हुई थी। स्थानीय लोग लगातार इस डेंजर जोन को सुधारने की गुहार लगा रहे थे] लेकिन मंत्री विक्रमादित्य सिंह के महकमे ने शिकायतों की फाइलों को दबाए रखा।
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ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली की पोल खोलते हुए बताया कि जिस खूनी मोड़ पर कोई सुरक्षा दीवार या क्रैश बैरियर नहीं था, वहां अक्षय की मौत के ठीक अगले ही दिन विभाग ने फुर्ती दिखाई। हादसे के बाद आनन-फानन में क्षतिग्रस्त सड़क किनारे चेतावनी बोर्ड टांग दिए गए और औपचारिकता पूरी करने के लिए पत्थर रख दिए गए। लोगों का सवाल है कि क्या प्रशासन को जगाने के लिए किसी मासूम की बलि चढ़ना जरूरी था?
बता दें कि 24 जून की रात को अक्षय की गाड़ी अनियंत्रित होकर नरघोटा के पास 400 मीटर गहरी खाई में समा गई थी। इस दिल दहला देने वाले हादसे में अक्षय की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ गाड़ी में मौजूद महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं। अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रही इस महिला का चिकित्सकों को एक हाथ काटना पड़ा है, जिससे पूरा इलाका स्तब्ध है।
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दिवंगत अक्षय कोडा कोई आम युवक नहीं थे वह भारतीय सेना के जवानों को शेयर बाजार में निवेश करने और उनके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए मार्गदर्शन व प्रशिक्षण देते थे। उनके इस तरह अचानक चले जाने से न केवल उनका परिवार टूट गया है, बल्कि देश की सेवा में तैनात कई सैनिक भी सदमे में हैं। कई सैन्य जवानों ने भी सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से अक्षय के परिवार की निष्पक्ष जांच की मांग का पुरजोर समर्थन किया है।
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मामले की गंभीरता और जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तुरंत इस मामले में उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। सीएम ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए भरोसा दिलाया है कि इस लापरवाही में जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। वहीं दूसरी ओर, परिजनों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक दोषियों की जवाबदेही तय नहीं होती और लोक निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज नहीं गिरती, तब तक न्याय की यह लड़ाई थमेगी नहीं।