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May 28, 2025

CM सुक्खू बोले- नर्स भर्ती में कोरोना वारियर्स को मिलेगी प्राथमिकता, जानिए कैसे होगी भर्ती

मेडिकल लाइन में खर्च होंगे 1350 करोड़ रुपये

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Sukhu Government

शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुधार की दिशा में सुक्खू सरकार ने बड़ी पहल की है। CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नर्सिंग स्टाफ की भर्ती में कोरोना वॉरियर्स को प्राथमिकता देने का एलान किया है।

नर्स भर्ती में कोरोना वारियर्स को मिलेगी प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि सरकारी अस्पतालों में 20 वर्ष से पुरानी मशीनों को अगले एक वर्ष के अंदर बदला जाएगा। साथ ही, मेडिकल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में 1350 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना पर कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार नर्सों की भारी कमी को भी शीघ्र पूरा करेगी और इस प्रक्रिया में कोविड वॉरियर्स को प्राथमिकता दी जाएगी।

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एक वर्ष की नौकरी होगी खत्म?

आपको बता दें कि CM सुक्खू ने राज्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों IGMC शिमला और टांडा मेडिकल कॉलेज में PG के बाद रजिस्ट्रार बनने के लिए आवश्यक एक वर्ष की नौकरी की शर्त को समाप्त करने के संकेत दिए हैं। CM सुक्खू ने इस संबंध में अधिकारियों को जल्द निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं, जिससे मेडिकल ग्रेजुएट्स को राहत मिल सके और दोनों संस्थानों में रजिस्ट्रार डॉक्टरों की कमी को दूर किया जा सके।

डॉक्टरों की भारी कमी

वर्तमान स्थिति में केवल इन दो कॉलेजों पर ही यह बाध्यता लागू थी, जबकि अन्य किसी भी मेडिकल संस्थान में यह नियम प्रभावी नहीं था। इसका परिणाम यह हुआ कि डॉक्टर PG के बाद अनिवार्य रूप से इन संस्थानों में एक वर्ष की सेवा देने से बचते रहे, जिससे रजिस्ट्रार स्तर पर डॉक्टरों की भारी कमी सामने आ रही थी और इससे मरीजों की देखभाल सहित अस्पताल की कार्यप्रणाली भी प्रभावित हो रही थी।

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स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधार की तैयारी

CM सुक्खू ने सोमवार को IGMC शिमला और AIMSS चमियाणा के फैकल्टी सदस्यों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और सुधारों पर चर्चा की। बैठक में डॉ. कपिला ने अस्पतालों के आधारभूत ढांचे, डॉ. राहुल राव ने डॉक्टरों और कर्मचारियों की कमी, जबकि डॉ. सोढी ने मशीनों की कमी को उठाया।

IGMC को मिलेंगे 200 करोड़ रुपये

CM सुक्खू ने यह भी घोषणा की कि IGMC शिमला को अतिरिक्त 200 करोड़ रुपये की धनराशि शीघ्र उपलब्ध करवाई जाएगी- ताकि संस्थान में ढांचागत सुधार और सुविधाएं बढ़ाई जा सकें। इसके साथ ही पैरा मेडिकल स्टाफ और तकनीशियनों की भर्ती पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि डॉक्टर-मरीज और नर्स-मरीज अनुपात को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार लाया जाए, ताकि अस्पतालों में सेवाएं अधिक प्रभावी और मानवीय बन सकें।

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CM सुक्खू ने यह भी कहा कि राज्य के कई प्रीमियम स्वास्थ्य संस्थान अब केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं, इसलिए उनका पुनर्गठन और आधुनिकीकरण जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और सर्वसुलभ बनाने की दिशा में पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

स्वास्थ्य मंत्री ने जताई संतुष्टि

स्वास्थ्य मंत्री कर्नल डॉ. धनी राम शांडिल ने मुख्यमंत्री के साथ संवाद को सकारात्मक बताते हुए कहा कि ऐसे संवाद स्वास्थ्य सेवाओं के कायाकल्प में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में मेडिकल एजुकेशन का स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है और सभी स्वास्थ्यकर्मी पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहे हैं।

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