#धर्म
October 26, 2026
हिमाचल का ये गांव है नशे से कोसों दूर, देवता के आदेश पर बीड़ी-सिगरेट और गुटखे की भी ‘नो एंट्री’
संतान की कामना लेकर भी पहुंचते हैं लोग
शेयर करें:

कुल्लू। देवभूमि कुल्लू में देवी-देवताओं से जुड़ी कई ऐसी परंपराएं हैं, जिन्हें लोग आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं। कुल्लू के फलाण गांव में भी एक ऐसी ही परंपरा सदियों से चली आ रही है। यहां बीड़ी-सिगरेट पीना तो दूर, इन्हें गांव की सीमा के अंदर लाना भी मना है। तंबाकू, खैनी और गुटखा जैसे नशीले पदार्थों से भी लोग दूर रहते हैं। ग्रामीणों का मानना है कि यह रोक देवता शिवराड़ी नारायण के आदेश के बाद लगी थी।
गांव में देवता शिवराड़ी नारायण के आदेश को सबसे ऊपर माना जाता है। यही वजह है कि गांव का कोई भी व्यक्ति बीड़ी, सिगरेट या तंबाकू का सेवन करने की हिम्मत नहीं करता। बताया जाता है कि यह परंपरा कई पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी ग्रामीण इसे उसी तरह निभा रहे हैं।
यह भी पढें : हिमाचल कांग्रेस नेता ने उड़ाया BJP विधायक सत्ती की बीमारी का मजाक, डिप्टी CM ने भी लगाए ठहाके
इन दिनों अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में देवी-देवताओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। इसी दौरान देवता शिवराड़ी नारायण की अनोखी परंपराएं भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। खासकर गांव में तंबाकू और बीड़ी-सिगरेट पर लगी रोक लोगों का ध्यान खींच रही है।
देवता के गूर राकेश कुमार ने बताया कि मान्यता के अनुसार प्राचीन समय में सीघी और धिंगी नाम के दैत्यों के साथ देवता शिवराड़ी नारायण का युद्ध हुआ था। इस दौरान देवता की सेना पर संकट आ गया। दैत्यों से बचने के लिए देवता ने तंबाकू के फूल में मधुमक्खी का रूप धारण कर खुद को छिपा लिया।
यह भी पढें : हिमाचल : घर से ही चलाता था नशे का कारोबार, पुलिस ने मारी रेड; मिला ढेर सारा चिट्टा- तस्कर अरेस्ट
मान्यता है कि देवता ने तंबाकू के फूल से अपना ठिकाना छिपाए रखने का आग्रह किया था। लेकिन जब दैत्य वहां पहुंचे तो फूल की डाली झुक गई। इससे दैत्यों को पता चल गया कि देवता वहां छिपे हुए हैं। इसके बाद देवता ने आदेश दिया कि गांव में तंबाकू का सेवन नहीं किया जाएगा। तभी से ग्रामीण इस परंपरा को निभाते आ रहे हैं।
गांव में अगर कोई बाहरी व्यक्ति बीड़ी-सिगरेट या तंबाकू का सामान लेकर आता है तो उसे भी ये चीजें गांव की सीमा से बाहर रखनी पड़ती हैं। ग्रामीणों का कहना है कि देवता के आदेश और मान्यता के कारण आज तक किसी ने इस परंपरा को तोड़ने की कोशिश नहीं की।
यह भी पढें : हिमाचल : घर से निकला 36 वर्षीय व्यक्ति लापता, फोन भी बंद- परिवार ने लगाई मदद की गुहार
देवता शिवराड़ी नारायण को लेकर ग्रामीणों में गहरी आस्था है। मान्यता है कि संतान की इच्छा रखने वाली महिलाएं यहां आकर देवता से मन्नत मांगती हैं और उनकी मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के चलते दूर-दूर से लोग देवता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
फलाण गांव में सिर्फ शिवराड़ी नारायण ही नहीं, बल्कि फलाणी नारायण, त्रिजुगी नारायण और पंचाली नारायण से जुड़ी परंपराओं में भी बीड़ी-सिगरेट और तंबाकू के सामान को गांव में लाना मना माना जाता है। ग्रामीण आज भी इन देव आदेशों का पालन कर रहे हैं और गांव को नशे से दूर रखने की पुरानी परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।