#धर्म
October 27, 2026
करवा चौथ पर इस बार कब रखें व्रत? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और सरगी खाने का सही समय
29 अक्टूबर को रखा जाएगा करवाचौथ का व्रत
शेयर करें:

शिमला। देवभूमि हिमाचल के बाजारों में त्योहारों की अलग ही धूम दिखाई दे रही है। त्योहारी सीजन को लेकर मार्केट में लोगों की चहल-पहल लगी हुई है। बाजार में दुकानें रंग-बिरंगी चूड़ियों, साज-श्रृंगार के सामान और रंगीन लाइटों से सजी हुई हैं।
सूबे के हर इलाके में इन दिनों दुकानों पर महिलाओं की ज्यादा भीड़ देखने को मिल रही है। दरअसल, कल करवा चौथ है- ऐसे में महिलाएं करवा चौथ के लिए शॉपिंग करने में लगी हुई हैं। करवा चौथ के लिए महिलाएं बाजारों से कपड़ों, गहनों और श्रृंगार के सामान की खूब खरीददारी कर रही हैं। इतना ही नहीं सूबे के ब्यूटी पार्लर्स में कल के दिन सजने-संवरने के लिए महिलाओं ने एडवांस बुकिंग कर रखी है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल : होटल में चल रहा था चिट्टे का खेल, एक लाख नगदी सहित मिला ढेर सारा नशा; 3 अरेस्ट
आपको बता दें कि करवा चौथ का व्रत महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और खुशाली के लिए रखती हैं। ये व्रत काफी कठिन होता है। महिलाएं दिनभर भूखे-प्यासे रह कर ये व्रत रखती हैं और फिर शाम को चांद को अर्घ्य देने के बाद इस व्रत को खोलती हैं। करवा चौथ के दिन कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है- नहीं तो व्रत का फल नहीं मिलता है। आज अपने इस लेख में हम आपको बताएंगे कि करवा चौथ वाले दिन आपको क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।
आचार्य दीप कुमार के मुताबिक, पंचांग के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर की सुबह 1 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी और रात 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगी। इसी वजह से करवाचौथ का व्रत 29 अक्टूबर को ही रखा जाएगा।
यह भी पढ़ें : कुल्लू दशहरा: CM सुक्खू ने की बड़ी घोषणाएं, देवी-देवताओं के नजराने - बजंतरियों के भत्तों में की भारी बढ़ोतरी
यह त्योहार खासकर उत्तर भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखती हैं और पति की लंबी उम्र व सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।
आचार्य दीप कुमार ने बताया कि इस बार करवाचौथ के व्रत का समय सुबह 6:31 बजे से शाम 8:17 बजे तक रहेगा। वहीं पूजा के लिए शुभ समय शाम 5:38 बजे से 6:56 बजे तक रहेगा। इसी दौरान महिलाएं करवा माता की पूजा कर सकती हैं और व्रत कथा सुन सकती हैं।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: दिवाली की खुशियां हुई दोगुनी, 5 दिन की मिलेगी छुट्टी, महिलाओं को एक एक्स्ट्रा अवकाश
करवाचौथ में सरगी का खास महत्व माना जाता है। सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है। इस बार सरगी खाने का समय सुबह 3:30 बजे से 5:30 बजे के बीच माना गया है। महिलाओं को सूर्योदय से पहले सरगी खा लेनी चाहिए। इस साल सूर्योदय करीब सुबह 6:30 बजे होने की बात कही गई है।
करवाचौथ की पूजा के लिए सबसे पहले एक साफ चौकी पर करवा माता की तस्वीर रखें। इसके बाद भगवान गणेश की पूजा करें। पूजा के लिए मिट्टी का करवा या कलश लें और उसमें पानी भरें। पूजा की थाली में रोली, फूल, मिठाई, अक्षत और दूसरी जरूरी पूजा सामग्री रखें।
यह भी पढ़ें : हिमाचल की राजधानी में लगा लंबा जाम, कई घंटों तक फंसी रही AMBULANCE- रॉंग पार्किंग ने किया परेशान
इसके बाद करवा माता के सामने दीपक जलाकर पूजा करें। पूजा के दौरान करवाचौथ की व्रत कथा सुनी जाती है। कथा पूरी होने के बाद करवा माता और दूसरे देवी-देवताओं को फूल, अक्षत और मिठाई चढ़ाएं। चाहें तो परंपरा के अनुसार करवा माता को सुहाग की सामग्री भी अर्पित कर सकती हैं।
शाम को चांद निकलने के बाद महिलाएं सबसे पहले चंद्रमा के दर्शन करती हैं। इसके बाद छलनी से चांद को देखकर उन्हें जल से अर्घ्य दिया जाता है। चंद्रमा की पूजा करने के बाद पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है। इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर या कुछ खाकर व्रत खोला जाता है।