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August 15, 2025

पूरी दुनिया में सबसे अलग है हिमाचल का ये मंदिर, कृष्णा के साथ राधा नहीं मीरा की मूर्ती है विराजमान

नूरपुर के राजा लाए थे मूर्तियां

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Krishna Janmashtami

कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश देवी-देवताओं की भूमि है। इस पावन धरती पर एक मंदिर ऐसा है जिसका इतिहास बहुत पुराना है। ये मंदिर कांगड़ा जिले के नूरपुर के प्राचीन किला मैदान में है। इस मंदिर को भगवान श्री बृजराज स्वामी जी के मंदिर के नाम से जाना जाता है। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर आज हम आपको इस मंदिर की मंदिर की खासियत और कहानी के बारे में बताने वाले हैं।

विश्व में एकमात्र ऐसा मंदिर

नूरपुर में स्थित भगवान श्री बृजराज स्वामी जी का ये मंदिर बहुत खास है। माना जाता है कि पूरे विश्व में ये एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति राधा जी के साथ नहीं बल्कि मीरा बाई के साथ स्थापित है।

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पूरी होती है हर मनोकामना

मंदिर में स्थापित कृष्ण और मीरा की मूर्तियां बेहद अलौकिक और आकर्षक हैं। इनके दर्शन से ही भक्त की हर मनोकामना पूरी हो जाती है। मूर्तियां इस तरह से बनी हैं मानो स्वयं भगवान आपके समक्ष खड़े हों।

क्या है मूर्तियों की कहानी ?

एक बार चित्तौड़गढ़ के राजा ने नूरपुर के राजा जगत सिंह को निमंत्रण भेजा। निमंत्रण पर जगत सिंह अपने राज पुरोहित के साथ वहां पहुंचे। सिंह व उनके पुरोहित को जिस महल में विश्राम के लिए ठहराया गया, उसके बगल में एक मंदिर था।

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सुनी घुंघरुओं की आवाज 

रात में राजा जगत सिंह को उस मंदिर से घुंघरुओं की आवाज और संगीत सुनाई दिया। जब राजा ने खिड़की से बाहर देखा तो मंदिर में एक औरत श्रीकृष्ण की मूर्ति के सामने भजन गाते हुए नाच रही थी। उस मंदिर में साक्षात कृष्ण और मीरा की मूर्तियां थीं।

उपहार में मांग ली मूर्तियां

राजा जगत सिंह ने पूरी बात अपने पुरोहितों को बताई तो वापसी के समय उन्होंने मूर्तियां उपहार स्वरूप मांग ली। चित्तौड़गढ़ के राजा ने खुशी-खुशी उन्हें ये मूर्तियां भेंट कर दी। फिर जगत सिंह ने अपने दरबार को मंदिर में बदल वहां दोनों मूर्तियां स्थापित कर दी।

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रोज आते हैं भगवान कृष्ण

ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में रोज रात भगवान कृष्ण आते हैं। इसी के चलते रोजाना इस मंदिर में पूजा-पाठ होता है। रात में मंदिर के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। मंदिर बंद करने से पहले मूर्तियों के सामने शयनासन, चरण पादुकाएं और एक गिलास पानी से भरा रखा जाता है। 

कृष्ण व मीरा करते हैं विश्राम

सुबह जब मंदिर के द्वार खोले जाते हैं तो शयनासन पर सिलवटें होती हैं। पानी का गिलास गिरा होता है। इन्हीं कारणों की वजह से ऐसा माना जाता है कि रात में श्रीकृष्ण और मीराबाई यहां विश्राम करते हैं।

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