#हादसा
August 21, 2025
हिमाचल : पक्षियों को दाना डालने आया था टीचर, बंदरों ने घेरा- छत से गिर गया बेचारा
चार मंजिला मकान की छत से गिरा टीचर- निकले प्राण
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां निरमंड में बंदरों की वजह की एक शिक्षक की जान चली गई है। घटना के वक्त शिक्षक अपने घर की छत पर पक्षियों को दाना डालने गया हुआ था।
बताया जा रहा है कि शिक्षक रोजाना पक्षियों को दाना डालने के लिए घर की छत पर जाता था। कल जब वो दाना डाला रहा था तो बंदरों के झुंड ने उसे घेर लिया। ऐसे में खुद को बचाने के चक्कर में उसका संतुलन बिगड़ा और वो चार मंजिला मकान की छत से गिर गया।
यह हादसा निरमंड विकास खंड की ब्रौ पंचायत में बुधवार सुबह पेश आया। परिजनों ने बताया कि सेवानिवृत्त शिक्षक देश लाल गौतम (65) हर दिन की तरह सुबह करीब छह बजे अपने घर की छत पर पक्षियों को दाना डालने गए थे।
दाना डालने के कुछ ही देर बाद अचानक बंदरों का एक झुंड वहां आ धमका। बंदरों ने शिक्षक पर हमला कर दिया। घबराहट और खुद को बचाने की कोशिश में गौतम का संतुलन बिगड़ गया और वे चार मंजिला मकान की छत से नीचे जा गिरे।
भवन से गिरने के कारण उन्हें गंभीर चोटें आईं और वो बेसुध हो गए। आसपास मौजूद लोगों और परिजनों ने उन्हें तुरंत खनेरी अस्पताल पहुंचाया, जहां मौजूद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर है।
यह कोई पहला मामला नहीं है। शिमला में भी पिछले कुछ वर्षों में बंदरों के हमले के चलते छत से गिरकर मौतें हो चुकी हैं। एक महिला की मौत उस समय हुई जब वह छत पर कपड़े समेटने गई और बंदरों ने हमला कर दिया। डर से वह नीचे गिर गई।
उपनगर ढांडा में भी एक युवती बाल सुखाने छत पर गई थी, तभी बंदरों ने घेर लिया। अफरा- तफरी में वह नीचे गिरी और उसकी मौत हो गई। वहीं, कुफटाधार क्षेत्र में भी एक युवक बंदरों के हमले में गंभीर रूप से घायल हुआ था।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। DSP आनी चंद्रशेखर कायथ ने हादसे की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में मौत छत से गिरने के कारण हुई है। पुलिस मामले की गहनता से जांच कर रही है।
वन विभाग के नियमों के अनुसार, बंदरों के हमले में अगर किसी की जान जाती है तो परिजनों को एक लाख रुपये की मुआवजा राशि दी जाती है। वर्तमान में प्रदेश में बंदरों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान चल रहा है, लेकिन इसके बावजूद कस्बों से लेकर शहरों तक बंदरों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा।
स्थानीय लोग लगातार प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं कि बंदरों के बढ़ते हमलों पर काबू पाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। ग्रामीण इलाकों में लोग छत पर जाने या खेतों में काम करने से पहले कई बार बंदरों के झुंड को भगाने की मशक्कत करते हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और भी बड़ा बन गया है।