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February 20, 2026

अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव: सरस मेले में छाई पहाड़ी कला, लकड़ी के मंदिर मॉडल बने आकर्षण

चर्चा का विषय बने हुए है छज्जू राम

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Mandi Saras Mela 2026

मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में चल रहे अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2026 के बीच सरस मेला लोगों के लिए खास आकर्षण बना हुआ है। इंदिरा मार्केट की छत पर सजे इस मेले में सिर्फ खरीदारी ही नहीं, बल्कि हिमाचल की पारंपरिक कला, संस्कृति और हुनर की खूबसूरत झलक देखने को मिल रही है। देश-प्रदेश से आए कारीगर अपने हाथों से बनाए अनोखे उत्पादों के जरिए यहां की लोक परंपरा को जीवंत कर रहे हैं, जिससे मेले की रौनक और भी बढ़ गई है।

लोग लगा रहे है अलग-अलग स्टॉल

बता दें कि मेले में देश के 14 बाहरी राज्यों के अलावा हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों और मंडी जिले के 14 विकास खंडों से स्वयं सहायता समूहों ने अपने-अपने स्टॉल लगाए हैं। कहीं हाथ से बने ऊनी कपड़े और शॉल मिल रहे हैं, तो कहीं पहाड़ी अचार, चटनी, शहद और अन्य घरेलू उत्पाद लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

 

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चर्चा का विषय बने हुए है छज्जू राम

सजावटी सामान, लकड़ी और बांस से बनी वस्तुएं और लोककला के नमूने भी खरीददारों को खूब पसंद आ रहे हैं। हर स्टॉल अपने क्षेत्र की अलग पहचान और परंपरा को दिखाता नजर आता है। इसी मेले में बालीचौकी तहसील के पंजाई गांव डोभा के रहने वाले हस्तशिल्पकार छज्जू राम का स्टॉल खास चर्चा में है।

 

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छज्जू राम लकड़ी से बने छोटे-छोटे मंदिरों के मॉडल लेकर आए हैं, जो हिमाचल की पारंपरिक काष्ठकुणी और पगौड़ा शैली में तैयार किए गए हैं। इन मॉडलों में बारीक नक्काशी और पारंपरिक डिजाइन इतनी सुंदर तरीके से बनाई गई है कि लोग रुककर इन्हें ध्यान से देख रहे हैं।

देवरथों के मॉडल ने खींचा पर्यटकों का ध्यान

छज्जू राम पिछले करीब तीन साल से इस काम में जुटे हैं। उनके स्टॉल पर देवी-देवताओं के देवरथों के मॉडल भी रखे गए हैं, जो हिमाचल की देवसंस्कृति को दर्शाते हैं। खूबसूरत कारीगरी और अनोखे डिजाइन के कारण उनका स्टॉल अब सेल्फी प्वाइंट बन गया है। मेले में आने वाले पर्यटक यहां रुककर तस्वीरें खिंचवा रहे हैं और कारीगरी की जमकर तारीफ कर रहे हैं।

 

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 कारीगरों की टीम तैयार करती है हर मॉडल

छज्जू राम का कहना है कि वे करीब 10 कारीगरों की टीम के साथ मिलकर यह काम करते हैं। लकड़ी चुनने से लेकर नक्काशी और अंतिम रूप देने तक हर काम में काफी मेहनत और समय लगता है। उनका कहना है कि लोगों से मिल रही सराहना उन्हें आगे और बेहतर काम करने की प्रेरणा देती है।

कला को मिल रही पहचान

कुल मिलाकर, मंडी का सरस मेला इस बार सिर्फ खरीदारी का केंद्र नहीं रहा, बल्कि यह हिमाचल की पारंपरिक कला, लोकसंस्कृति और स्थानीय कारीगरों की प्रतिभा को सामने लाने का बड़ा मंच बन गया है। यह मेला कारीगरों को पहचान दिलाने के साथ-साथ प्रदेश की संस्कृति को आगे बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

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