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August 25, 2026

श्रीखंड महादेव की यात्रा शुरू- रास्ते में रहेगा ITBP का पहरा , जानें कब निकलेगा पहला जत्था

ऑक्सीजन की कमी और मौसम बनते हैं बड़ी चुनौती

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Shrikhand Mahadev Yatra

कुल्लू। श्रीखंड महादेव के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की यात्रा इस बार नए रास्ते से शुरू होने  वाली है। करीब 12 साल बाद ज्यूरी के ऊनू महादेव से श्रीखंड महादेव यात्रा शुरू करने की तैयारी चल रही है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और किसी भी आपात स्थिति में रेस्क्यू के लिए ITBP की 19वीं वाहिनी को जिम्मेदारी दी गई है।

30 अगस्त से 5 सितंबर तक चलेगा अभियान

रामपुर के एसडीएम गुरु हर्ष अमरेंद्र सिंह ने बताया कि प्रस्तावित यात्रा 30 अगस्त से 5 सितंबर तक आयोजित की जाएगी। इस दौरान ITBP के जवान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था संभालने के साथ-साथ किसी श्रद्धालु के फंसने या किसी अन्य आपात स्थिति में बचाव के लिए तैयार रहेंगे।

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हालांकि, इस साल श्रीखंड महादेव की यात्रा प्रशासन की ओर से अपने नियमित तरीके से नहीं करवाई गई है। हर साल यह यात्रा जुलाई में आयोजित होती है, लेकिन इस बार भारी बारिश के चलते कुल्लू की ओर से जाने वाली यात्रा को रोक दिया गया था।

बोण्डा रहेगा ITBP अभियान का मुख्य केंद्र

ITBP की 19वीं वाहिनी की ओर से जिला प्रशासन को भेजे पत्र के अनुसार श्रीखंड महादेव शिखर अभियान का मुख्य केंद्र बोण्डा स्थित 19वीं वाहिनी मुख्यालय रहेगा। इस अभियान का मकसद जवानों को श्रीखंड के कठिन रास्ते, इलाके और वहां की परिस्थितियों से परिचित करवाना भी है, ताकि भविष्य में जरूरत पड़ने पर रेस्क्यू ऑपरेशन तेजी से किया जा सके।

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प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर काम करेंगे जवान

अभियान के दौरान ITBP की टीम जिला प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करेगी। जवानों को यात्रा मार्ग पर सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े नियमों का पालन करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मुश्किल रास्ते में रेस्क्यू की होगी तैयारी

श्रीखंड महादेव का रास्ता बेहद ऊंचाई और कठिन पहाड़ी परिस्थितियों वाला है। ऐसे में किसी श्रद्धालु के रास्ते में फंसने, अचानक मौसम खराब होने या किसी दुर्घटना की स्थिति में रेस्क्यू करना आसान नहीं होता। ITBP के जवान अभियान के दौरान संभावित रेस्क्यू प्वाइंट और रास्ते की स्थिति का जायजा लेंगे और आपात स्थिति से निपटने की तैयारी करेंगे।

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2014 में रोक दी गई थी ज्यूरी से यात्रा

ज्यूरी के ऊनू महादेव से श्रीखंड महादेव की यात्रा पहले भी होती थी। वर्ष 2006 से 2014 तक ज्यूरी से फांचा और नांती-टिक्कर होते हुए यात्रा आयोजित की जाती थी। लेकिन 2014 में सुरक्षा कारणों और कठिन रास्ते को देखते हुए इस मार्ग से यात्रा रोक दी गई थी। अब करीब 12 साल बाद प्रशासन ने एक बार फिर इस रास्ते से यात्रा शुरू करने की पहल की है।

18,570 फीट की ऊंचाई पर है श्रीखंड महादेव

श्रीखंड महादेव धाम समुद्र तल से करीब 18,570 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां प्राकृतिक शिवलिंग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को बेहद कठिन पहाड़ी रास्ते से गुजरना पड़ता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांव से श्रीखंड तक करीब 32 से 35 किलोमीटर का पैदल रास्ता है।

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ऑक्सीजन की कमी और मौसम बनते हैं बड़ी चुनौती

ऊंचाई बढ़ने के साथ रास्ते में ऑक्सीजन की कमी महसूस होने लगती है। इसके अलावा कई जगह ग्लेशियर, फिसलन और खड़ी चढ़ाई भी श्रद्धालुओं के लिए मुश्किल पैदा करती है। पहाड़ों में मौसम भी अचानक बदल जाता है। इसी वजह से श्रीखंड महादेव यात्रा को बेहद कठिन धार्मिक यात्राओं में गिना जाता है।

सुरक्षा व्यवस्था पर रहेगा खास जोर

प्रशासन की ओर से यात्रा के दौरान अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है। ITBP की मौजूदगी से किसी भी आपात स्थिति में श्रद्धालुओं तक जल्दी पहुंचने और रेस्क्यू ऑपरेशन को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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