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August 3, 2026

40 साल का इंतजार खत्म- बड़ा देव कमरूनाग के दर पर शक्तियां अर्जित करने आएंगे देव बालाटिका

चार दिनों तक चलेगा धार्मिक कार्यक्रम, श्रद्धालुओं में भारी उत्साह

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DEV BALATIKA KAMRUNAG PILGRIMAGE BADA DEVTA KAMRUNAG TEMPLE SERAJ MANDI

मंडी। देवभूमि हिमाचल के मंडी जिले में इन दिनों धार्मिक आस्था और देव संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है।  सराज विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत लेहथाच के आराध्य देव बालाटिका लगभग चार दशक बाद देव कमरूनाग के पवित्र दरबार में हाजिरी लगाने के लिए रवाना हुए हैं।

40 साल का इंतजार खत्म

2 अगस्त से शुरू हुई यह ऐतिहासिक धार्मिक यात्रा 5 अगस्त तक चलेगी। लंबे समय बाद हो रही इस यात्रा को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। देवता साहब के दर्शन करने के लिए श्रद्धालुओं की काफी भीड़ उमड़ रही है।

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सात हारों के श्रद्धालु बने यात्रा का हिस्सा

रविवार सुबह देव बालाटिका का भव्य प्रस्थान हुआ। इस धार्मिक यात्रा में सात हारों के श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हुए। इनमें लेह गाड़, सुराह उधीं गाड़, शिकावरी, गुनास, काढीं सुनास, तादं कुथानी और मुथहाग क्षेत्र के लोग प्रमुख रूप से शामिल हैं।

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शक्तियां अर्जित करने आएंगे देव बालाटिका

देवता के साथ करीब 200 श्रद्धालु भी कमरूनाग की यात्रा पर निकले हैं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों, धार्मिक अनुष्ठानों और जयकारों के बीच निकली यह यात्रा पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना रही है।

देव संस्कृति का दुर्लभ अवसर

स्थानीय लोगों के अनुसार, देव बालाटिका का कमरूनाग दरबार जाना केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि सदियों पुरानी देव परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। करीब 40 वर्षों बाद यह अवसर आने से गांव-गांव में विशेष उत्साह का माहौल है। श्रद्धालु इसे सौभाग्य मानते हुए यात्रा में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं।

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यात्रा को सफल बनाने के लिए व्यवस्था पूरी

देव बालाटिका के गुर झाबे राम ठाकुर ने बताया कि यात्रा को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पहले ही पूरी कर ली गई हैं। श्रद्धालुओं के ठहरने, भोजन और अन्य सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं, युवाओं और बच्चों में भी इस धार्मिक आयोजन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।

चार दिनों तक चलेगा धार्मिक कार्यक्रम

यात्रा के पहले दिन देव बालाटिका लेह कोठी से प्रस्थान कर विभिन्न पड़ावों से होते हुए धग्यारा पहुंचे, जहां रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई। जिसमें-

  • 3 अगस्त को यात्रा का मुख्य चरण होगा, जब देवता कमरूनाग के पवित्र दरबार पहुंचेंगे। वहां विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की जाएगी। शाम के समय धार्मिक अनुष्ठानों के बाद श्रद्धालुओं के लिए भोजन और रात्रि विश्राम का कार्यक्रम रहेगा।
  • 4 अगस्त की सुबह विशेष पूजा के बाद वापसी यात्रा शुरू होगी। रास्ते में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के लिए भोजन और विश्राम की व्यवस्था रहेगी। शाम को काण्डा में अल्प विश्राम के बाद यात्रा आगे बढ़ेगी और रात को देवता अपने मूल स्थान कमीशरधार पहुंचेंगे, जहां विशेष पूजा-अर्चना संपन्न होगी।
  • 5 अगस्त को अंतिम दिन देवता की पूजा के बाद लेह कोठी के लिए प्रस्थान किया जाएगा। सुबह लगभग 11 बजे देवता के पहुंचने पर भव्य स्वागत किया जाएगा। इस अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

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गाडू डालने की परंपरा का विशेष महत्व

देव बालाटिका के गुर झाबे राम ठाकुर ने बताया कि इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान 'गाडू डालना' है। यह प्रक्रिया देव कमरूनाग से आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने की परंपरा का हिस्सा मानी जाती है।

देवता के लिए विशेष चादर

मंगलवार को यह अनुष्ठान संपन्न होगा। इसके बाद देवता को एक विशेष चादर से ढक दिया जाएगा और फिर उन्हें उनके मूल स्थान पर पहुंचने के बाद ही विधिवत खोला जाएगा। इस परंपरा को स्थानीय देव संस्कृति में अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना जाता है।

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भक्ति और परंपरा का अनोखा संगम

देव बालाटिका के कटवाल मेघ सिंह ठाकुर ने बताया कि लगभग चार दशक बाद हो रही यह यात्रा पूरे सराज क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि देव कमरूनाग के दरबार में देव बालाटिका की उपस्थिति धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस आयोजन ने सातों हारों के लोगों को एक सूत्र में बांध दिया है और पूरा क्षेत्र भक्ति, परंपरा तथा लोक संस्कृति के रंग में रंग गया है।

दूर-दूर से आ रहे श्रद्धालु

स्थानीय लोगों का मानना है कि ऐसी धार्मिक यात्राएं केवल आस्था को ही नहीं, बल्कि हिमाचल की समृद्ध देव संस्कृति, सामाजिक एकता और पारंपरिक मूल्यों को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बनती हैं। यही कारण है कि इस ऐतिहासिक यात्रा को देखने और इसमें शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दूर-दूर से सराज पहुंच रहे हैं।

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