#राजनीति
January 19, 2026
BJP चीफ के पद से जेपी नड्डा का इस्तीफा कल: नितिन नबीन निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए
नितिन नबीन कल भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में लेंगे शपथ
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नई दिल्ली/शिमला। भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक इतिहास में 20 जनवरी 2026 एक अहम तारीख के रूप में दर्ज होने जा रही है। हिमाचल प्रदेश से संबंध रखने वाले भाजपा के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा का छह साल का लंबा कार्यकाल कल औपचारिक रूप से समाप्त हो रहा है। इसके साथ ही पार्टी की कमान अब नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन नबीन को सौंपी जाएगी। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद नितीन नबीन का अध्यक्ष पद के लिए एकमात्र नामांकन सामने आया है, जिसके चलते वह निर्विरोध भाजपा के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। नितीन नबीन कल 20 जनवरी को औपचारिक रूप से अध्यक्ष पद की शपथ लेंगे।
बीजेपी के वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के कार्यकाल का कल अंतिम दिन होगा। नड्डा कल 20 जनवरी को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा देंगे और नए अध्यक्ष नितिन नवीन को अध्यक्ष पद की कमान सौपेंगे। जगत प्रकाश नड्डा के 6 साल के कार्यकाल में बीजेपी ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। वैसे तो उनका कार्यकाल 3 साल के लिए ही था, लेकिन पहले कोविड और फिर लोकसभा चुनाव के कारण इसे बढ़ाया गया, और अब वे पूरे छह साल का कार्यकाल समाप्त कर रहे हैं।
बतौर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जगत प्रकाश नड्डा का कार्यकाल बेहद सफल रहा। अपने कार्यकाल में उन्होंने भाजपा को कई राज्यो में जीत दिलाई। जेपी नड्डा को जून 2019 में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था। उसके बाद जनवरी 2020 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। तीन साल के लिए चुने गए नड्डा पूरे छह साल तक पार्टी के शीर्ष संगठनात्मक पद पर बने रहे।
जेपी नड्डा के नेतृत्व में भाजपा ने कई राज्यों में विधानसभा और लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया। संगठन विस्तार, बूथ स्तर तक मजबूती और अनुशासित कार्यशैली उनकी पहचान रही। नड्डा के कार्यकाल में पार्टी ने कई नए सामाजिक और क्षेत्रीय वर्गों तक अपनी पहुंच बनाई, जिससे भाजपा की चुनावी ताकत और मजबूत हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ उनका तालमेल उनके पूरे कार्यकाल की पहचान रहा।
नड्डा के नेतृत्व में भाजपा और एनडीए ने 22 राज्यों में सत्ता हासिल की, जबकि 11 राज्यों में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। लोकसभा चुनावों में सीटों के लिहाज से नुकसान जरूर हुआ, लेकिन संगठनात्मक मजबूती और लाभार्थी आधारित राजनीति को नड्डा ने लगातार आगे बढ़ाया। कोविड काल के दौरान पार्टी संगठन के जरिए जरूरतमंदों तक राहत सामग्री पहुंचाने में भी उनकी भूमिका को अहम माना जाता है।
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