#विविध
June 17, 2026
हिमाचल की बड़ी जीत- मोदी सरकार ने मानी CM की शर्तें, अब 600 करोड़ का होगा फायदा
8 साल पुराना वित्तीय विवाद सुलझा
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के लिए लंबे समय से अटकी किशाऊ बांध परियोजना को लेकर बड़ी राहत की खबर सामने आई है। करीब आठ वर्षों से वित्तीय हिस्सेदारी को लेकर चल रहा विवाद अब समाप्त होता दिखाई दे रहा है। केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया है।
नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री और विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में 15 हजार करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 422 मेगावाट क्षमता की किशाऊ बांध परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। यह परियोजना टौंस नदी पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित है।
CM सुक्खू ने बैठक में प्रदेश हितों की मजबूती से पैरवी करते हुए कहा कि परियोजना से विस्थापन का सबसे अधिक असर हिमाचल प्रदेश पर पड़ेगा। ऐसे में राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना उचित नहीं होगा।
इसके बाद केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक सहमति देते हुए दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा जैसे लाभान्वित राज्यों द्वारा हिमाचल प्रदेश के हिस्से के विद्युत घटक से संबंधित करीब 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वहन करने का फैसला किया।

CM सुक्खू ने कहा कि पूर्व जयराम सरकार ने राज्य के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपये देने पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश के सीमित संसाधनों को देखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने तर्क दिया कि जब जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान दे रही है तो विद्युत घटक के लिए भी समान सहयोग मिलना चाहिए।
CM सुक्खू के अनुसार, परियोजना के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश को हर वर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली का हिस्सा मिलेगा। इसकी अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष होगी, जिससे प्रदेश के वित्तीय संसाधनों में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होगी।
CM सुक्खू ने इसे प्रदेश के अधिकारों और हितों की बड़ी जीत बताया। बैठक में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव केके पंत, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह और ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।