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February 13, 2026

कंगाली में 'मौज' की तैयारी पर फिरा पानी: सुक्खू सरकार ने रोका APMC चेयरमैनों की सैलरी बढ़ाने का फैसला

लग्जरी गाड़ियों को लेकर पहले ही हो चुकी है फजीहत

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Himachal News

शिमला। हिमाचल प्रदेश में पहले से ही लग्जरी गाड़ियों की खरीद को लेकर विवादों में घिरे कृषि उपज विपणन समिति (APMC) के चेयरमैनों को अब सरकार ने बड़ा झटका दिया है। महंगी स्कॉर्पियो-N गाड़ियां मिलने के बाद इन चेयरमैनों का मानदेय (सैलरी) 24 हजार रुपये से बढ़ाकर सीधे 80 हजार रुपये करने की तैयारी थी लेकिन प्रदेश के बिगड़ते आर्थिक हालात को देखते हुए सरकार ने इस प्रस्ताव को फिलहाल 'ठंडे बस्ते' में डाल दिया है।

80 हजार का सपना और RDG का झटका

मार्केटिंग बोर्ड ने सरकार को प्रस्ताव भेजा था कि चेयरमैनों की जिम्मेदारियों को देखते हुए उनका मासिक मानदेय 24 हजार से बढ़ाकर 80 हजार रुपये कर दिया जाए। सूत्रों के मुताबिक करीब एक महीने पहले सरकार इस पर काफी मेहरबान थी और मानदेय को 60 हजार रुपये तक बढ़ाने के लिए लगभग मान भी गई थी।

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इसी बीच 16वें वित्त आयोग द्वारा राजस्व घाटा अनुदान (RDG) को लेकर दी गई सिफारिशों ने सरकार की नींद उड़ा दी। राज्य में वित्तीय संकट गहराने लगा और 'फिस्कल इमरजेंसी' जैसे हालात बन गए। इसी दबाव के चलते सरकार ने चेयरमैनों की जेब भरने के बजाय खजाने को बचाने का फैसला लिया। कृषि सचिव सी. पालरासू ने पुष्टि की है कि फिलहाल मानदेय बढ़ाने पर रोक लगा दी गई है।

नेताओं के बढ़े वेतन पर चेयरमैनों पर 'कैंची'

हैरानी की बात ये है कि सरकार ने हाल ही में मंत्रियों और विधायकों के वेतन में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। इसके अलावा कई बोर्ड और निगमों के अध्यक्षों का मानदेय भी चार से पांच गुना तक बढ़ाया गया। इसी उम्मीद में APMC चेयरमैन भी बैठे थे लेकिन अब उनके लिए ये इंतजार और लंबा हो गया है।

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सोशल मीडिया पर हो रही थी जबरदस्त किरकिरी

सरकार के इस फैसले के पीछे जनता का भारी गुस्सा भी एक बड़ी वजह माना जा रहा है। एक तरफ वित्त सचिव देवेश कुमार ने प्रेजेंटेशन के जरिए सुझाव दिया कि प्रदेश को बचाने के लिए सब्सिडी बंद करनी पड़ेगी, DA फ्रीज करना होगा और सरकारी नौकरियों के खाली पद खत्म करने होंगे- वहीं दूसरी तरफ चेयरमैनों के लिए लाखों की गाड़ियां खरीदी जा रही थीं। इस विरोधाभास ने सोशल मीडिया पर बवाल खड़ा कर दिया था जिससे सरकार बैकफुट पर आ गई।

9 जिलों के चेयरमैनों को लगा झटका

वर्तमान में प्रदेश के 10 में से 9 जिलों (ऊना को छोड़कर) में APMC चेयरमैन तैनात हैं। किन्नौर और लाहौल-स्पीति की समितियां दूसरे जिलों के साथ जुड़ी हुई हैं। अगर ये प्रस्ताव पास हो जाता तो सरकारी खजाने पर हर महीने लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ता लेकिन फिलहाल सरकार ने 'आर्थिक अनुशासन' का हवाला देते हुए इस पर रोक लगा दी है।

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