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February 13, 2026

CM सुक्खू ने दूसरी बार बुलाई सर्वदलीय बैठक, प्रदेश पर छाए वित्तीय संकट पर होगी चर्चा

बैठक का एजेंडा- कैसे हिमाचल को आर्थिक गर्त से बाहर निकालना

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Himachal News

शिमला। हिमाचल प्रदेश के आर्थिक भविष्य के लिए आज का दिन बेहद निर्णायक साबित होने वाला है। राज्य पर मंडरा रहे गहरे वित्तीय संकट और केंद्र से मिलने वाली मदद रुकने की आशंका के बीच मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज सुबह 11 बजे सचिवालय में सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक का एकमात्र एजेंडा है- हिमाचल को आर्थिक गर्त से बाहर निकालना।

क्या है विवाद की जड़ ? (RDG का संकट)

इस पूरे संकट के केंद्र में है रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट। आसान भाषा में समझें तो राज्य की कमाई और खर्च के बीच जो अंतर (घाटा) होता है, उसकी भरपाई के लिए केंद्र सरकार ये ग्रांट देती है। हिमाचल को 15वें वित्त आयोग से करीब 37,199 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली थी, जिससे कर्मचारियों के वेतन और पेंशन का खर्च निकलता था। अब खबर है कि 16वें वित्त आयोग ने इस ग्रांट को बंद करने की सिफारिश कर दी है। यदि ऐसा होता है, तो हिमाचल के पास अपने रोजमर्रा के खर्चे चलाने के लिए भी पैसे नहीं बचेंगे।

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भाजपा का पिछला रुख और सीएम की नई पहल

बता दें कि 8 फरवरी को भी ऐसी ही एक प्रेजेंटेशन रखी गई थी, लेकिन मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने उससे किनारा कर लिया था। भाजपा की अनुपस्थिति के बावजूद वित्त सचिव ने तब चेतावनी दी थी कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो विकास कार्य ठप हो जाएंगे और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाएं बंद करनी पड़ सकती हैं।

 

आज की बैठक को लेकर मुख्यमंत्री ने बेहद नरम और एकजुटता भरा रुख अपनाया है। उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया है कि यह समय राजनीति का नहीं, बल्कि हिमाचल को बचाने का है। सरकार चाहती है कि सत्ता और विपक्ष मिलकर केंद्र के सामने एक सुर में अपनी बात रखें ताकि हिमाचल के हितों की रक्षा हो सके।

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आम जनता पर क्या होगा असर ?

वित्त विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर वित्तीय स्थिति नहीं सुधरी तो:

1. कर्मचारियों का DA (महंगाई भत्ता) और एरियर मिलना नामुमकिन हो जाएगा।
2. बुजुर्गों और विधवाओं को मिलने वाली पेंशन पर तलवार लटक सकती है।
3. नई सरकारी नौकरियों और विकास परियोजनाओं के लिए बजट नहीं बचेगा।

 

आज की बैठक केवल एक औपचारिक चर्चा नहीं है बल्कि ये तय करेगी कि हिमाचल प्रदेश आने वाले समय में अपने पैरों पर खड़ा रह पाएगा या नहीं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या भाजपा इस बार बैठक में शामिल होकर सरकार को सुझाव देगी या राजनीतिक खींचतान जारी रहेगी।

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