#राजनीति
February 12, 2026
हिमाचल: किसानों के पैसे से खरीदी लग्जरी गाड़ियां, चंबा पहुंचने से पहले ही हाद*से का शिकार
आर्थिक संकट में APMC ने खरीदी करोड़ों की गाड़ियां
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शिमला/चंबा। हिमाचल प्रदेश में एक तरफ जहां राजस्व घाटा अनुदान (RDG) कम होने से वित्तीय संकट की चर्चाएं गर्म हैं, वहीं दूसरी ओर 'हिमाचल प्रदेश राज्य कृषि उपज विपणन बोर्ड' (APMC) द्वारा 9 लग्जरी गाड़ियों की खरीद ने विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार ने अलग-अलग जिलों के APMC चेयरमैनों के लिए टॉप मॉडल 'स्कॉर्पियो-एन' गाड़ियां खरीदी हैं, जिनकी ऑन-रोड कीमत 16 से 24 लाख रुपये के बीच बताई जा रही है।
विवाद के बीच एक खबर ये आई कि चंबा के चेयरमैन के लिए ले जाई जा रही नई स्कॉर्पियो का रास्ते में ही एक्सीडेंट हो गया। कांगड़ा के नूरपुर के पास ये सरकारी गाड़ी एक ऑल्टो कार से टकरा गई। गनीमत रही कि हादसे में किसी को चोट नहीं आई, लेकिन नई गाड़ी का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। ये गाड़ी अभी 'एप्लाइड फॉर' (बिना नंबर) थी और इसे बोर्ड का ड्राइवर ही चला रहा था। हादसे के बाद गाड़ी को मरम्मत के लिए पठानकोट ले जाया गया है।
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इस खरीद को लेकर सबसे बड़ा सवाल चेयरमैनों की पात्रता पर उठ रहा है। जानकारों का कहना है कि नियमों के अनुसार, APMC चेयरमैन सरकारी वाहन के हकदार नहीं हैं। उन्हें केवल सरकारी बैठकों या मंडियों के निरीक्षण के लिए वाहन उपलब्ध कराया जा सकता है, अन्यथा उन्हें यात्रा भत्ता (TA) देने का प्रावधान है।
विपक्ष और किसान संगठनों का तर्क है कि APMC का बजट किसानों और बागवानों से ली जाने वाली 'मार्केट फीस' से बनता है। इस पैसे का इस्तेमाल नई मंडियों के निर्माण, सड़कों की मरम्मत और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए होना चाहिए, ना कि चेयरमैनों के लिए लग्जरी गाड़ियां खरीदने में।
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सूत्रों के मुताबिक, इन गाड़ियों की खरीद के लिए 50 प्रतिशत बजट राज्य सरकार ने दिया है, जबकि बाकी का 50 प्रतिशत हिस्सा बोर्ड और संबंधित जिलों की APMC ने अपने फंड से वहन किया है। तीन जिलों में ये गाड़ियां सौंपी जा चुकी हैं, जबकि छह जिलों में प्रक्रिया जारी है। इस पूरे मामले पर कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने कहा कि ये निर्णय निदेशक मंडल (Board of Directors) के स्तर पर हुआ होगा।
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दूसरी ओर, APMC बोर्ड के चेयरमैन कुलदीप सिंह पठानिया का कहना है कि उनके पदभार संभालने से पहले ही गाड़ियों की खरीद की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि ये सुनिश्चित किया जाएगा कि वाहनों का दुरुपयोग ना हो। सोशल मीडिया पर भी इस खरीद को लेकर काफी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। लोग प्रदेश के आर्थिक हालात का हवाला देते हुए सरकार की प्राथमिकता पर सवाल उठा रहे हैं।