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February 12, 2026

मोदी सरकार के खिलाफ हड़ताल: हिमाचल में सड़कों पर उतरे कर्मचारी, जानें क्या हैं मांगें

अनदेखी करने पर उग्र होगा आंदोलन

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Himachal News

शिमला/ऊना। पब्लिक सेक्टर के उपक्रमों के निजीकरण और नए लेबर कोड के विरोध में आज आयोजित राष्ट्रव्यापी हड़ताल का हिमाचल प्रदेश में व्यापक असर देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार की 'कर्मचारी विरोधी' नीतियों के खिलाफ विभिन्न संगठनों ने प्रदेश भर में मोर्चा खोल दिया है जिससे राजधानी शिमला सहित कई जिलों में विरोध की लहर तेज हो गई है।

शिमला में सीटू का हल्ला बोल

शिमला में सीटू (CITU) के बैनर तले विशाल प्रदर्शन आयोजित किया गया। आंदोलनकारियों ने पंचायत भवन और ओल्ड बस स्टैंड से लेकर मुख्य बाजार होते हुए CTO तक रोष रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार सार्वजनिक संपत्तियों को बेचने पर आमादा है और नए लेबर कोड के जरिए मजदूरों के अधिकारों का हनन किया जा रहा है।

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ऊना में गरजे विभिन्न संगठन

ऊना के एमसी पार्क में भी विरोध का स्वर मुखर रहा। यहां विभिन्न कर्मचारी यूनियनों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर कर्मचारी विरोधी फैसलों को वापस नहीं लिया गया तो ये आंदोलन और ज्यादा उग्र होगा।

मिड-डे मील वर्कर्स की अनदेखी

हड़ताल का एक बड़ा हिस्सा मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन (AITUC) भी रहा। चंबा के लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर और अन्य स्थानों पर एकत्रित कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। यूनियन की राज्य अध्यक्ष कमलेश ठाकुर ने कहा कि वर्षों से बेहद कम मानदेय पर काम कर रहीं महिलाओं की लगातार अनदेखी हो रही है। हालिया बजट में ना तो मानदेय बढ़ाया गया और ना ही नियमितीकरण के लिए कोई ठोस नीति लाई गई। उन्होंने साफ किया कि अगर उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जाएगा। 

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प्रदेश भर में हुए इन प्रदर्शनों ने साफ कर दिया है कि कर्मचारी वर्ग नीतियों से असंतुष्ट है। यूनियनों ने चेतावनी दी है कि अगर निजीकरण, मानदेय और लेबर कोड पर फैसला नहीं बदला गया तो ये संघर्ष उग्र आंदोलन में बदल जाएगा।

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