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November 15, 2025

नौकरी छोड़ चुनाव लड़ने गए हिमाचल कैडर के IPS की बिहार में करारी हार- जमानत भी जब्त

3433 वोट मिले, सिक्योरिटी जब्त

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jp singh ips

पटना। हिमाचल प्रदेश कैडर के पूर्व ADGP और 2000 बैच के IPS अधिकारी जय प्रकाश सिंह (JP Singh) बिहार की राजनीति में कदम तो रख पाए, लेकिन चुनावी जंग में उनका सफर बेहद निराशाजनक रहा। छपरा विधानसभा सीट से जन सुराज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे जे.पी. सिंह को सिर्फ 3433 वोट मिले और उनकी जमानत जब्त हो गई।

जमानत तक जब्त

हिमाचल में ऊंचे पदों पर काम कर चुके और CID तथा ट्रेनिंग एंड रिसर्च के मुखिया रह चुके इस अधिकारी का राजनीतिक डेब्यू जनता को प्रभावित नहीं कर पाया। इसके लिए उन्होंने नौकरी तक छोड़ दी और अब चुनाव में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा है। बड़ी बात तो ये है कि उनकी जमानत तक जब्त हो गई है।

 

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दो साल पहले ही नौकरी छोड़ चुनावी मैदान में उतरे थे

जय प्रकाश सिंह 31 जुलाई 2027 को रिटायर होने वाले थे, लेकिन उन्होंने जुलाई 2025 में ही स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर राजनीति में कदम रख लिया। VRS के बाद से ही वे छपरा विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय थे और चुनाव लड़ने के संकेत दे रहे थे।

कौन हैं पूर्व ADGP जे.पी. सिंह?

  • मूल निवासी: सारण जिला, बिहार
  • बैच: IPS 2000 बैच, हिमाचल प्रदेश कैडर
  • UPSC रैंक: 59वीं रैंक
  • VRS से पहले पद: ADGP (CID) और ADGP ट्रेनिंग एंड रिसर्च, हिमाचल पुलिस
  • उनकी पहली पोस्टिंग 2001 में कांगड़ा में एक ट्रेनी IPS के रूप में हुई थी।

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वे हिमाचल में कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे

  • कांगड़ा, चंबा, सिरमौर में SP
  • इंटेलिजेंस एवं विजिलेंस विभाग में प्रमुख भूमिकाएँ
  • राज्यपाल के ADC
  • कई अहम ऑपरेशनों और जांचों से जुड़ा अनुभव

शिक्षा और करियर बैकग्राउंड

जे.पी. सिंह ने 10वीं की पढ़ाई सरकारी स्कूल से की। आगे की पढ़ाई पटना कॉलेज से पूरी की और फिर कानून (Law) की डिग्री हासिल की। UPSC से पहले वे एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में नौकरी करते थे। उनकी UPSC सफलता, हिमाचल में 24 साल की सेवा और कड़क छवि ने उन्हें बिहार की राजनीति में एक मजबूत एंट्री दिलाई, लेकिन पहला ही चुनाव बेहद निराशाजनक साबित हुआ।

 

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चुनाव में क्यों नहीं चला अनुभव और कद?

राजनीति विशेषज्ञों के अनुसार

  • छपरा सीट पर स्थानीय उम्मीदवारों की जमीनी पकड़ मजबूत थी
  • पार्टी संगठन भी अपेक्षाकृत कमजोर
  • प्रशासनिक अनुभव को वोट में बदलना आसान नहीं होता

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