#राजनीति
February 10, 2025
हिमाचल में बढ़ी बेरोजगारों की फौज, सरकार ने भर्तियों पर लगाया फुल स्टॉप
8 लाख बेरोजगार परेशान- ना बहाल हुआ HPSSC, ना भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ी
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शिमला। हिमाचल में प्रति साल 1 लाख नौकरियों का वादा कर सत्ता में आई सुक्खू सरकार ने बेरोजगारों को सड़कों पर आने के लिए मजबूर कर दिया है। पिछले 2 सालों से हिमाचल प्रदेश स्टाफ सिलेक्शन कमीशन बंद होने के कारण भर्ती प्रक्रिया आगे ही नहीं बढ़ पा रही है। वहीं, सरकार नई नौकरियां निकालने के बजाय पुराने पद समाप्त करने या सरप्लस पूल में डाल रही है, जिस कारण बेरोजगारों का रोष और अधिक बढ़ गया है।
प्रदेश में लाखों बेरोजगार नौकरी का इंतजार कर रहे है। वहीं नौकरी ना मिलने की सूरत में प्रदेश सरकार से नाराजगी भी जाहिर कर चुके है। मगर बढ़ी खबर तो ये है कि HPSSC हमीरपुर पिछले 2 सालों से भंग है। जिसके कारण नई भर्तियों की प्रक्रिया अधर में लटकी है । ऐसे में 8 लाख पंजीकृत बेरोजगार परेशान हो चुके हैं।
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बताते चलें कि सरकार ने पहले बिजली बोर्ड में इंजीनियरों के 51 पद समाप्त किए जिसके बाद इसी विभाग में लगभग 700 पद सरप्लस पूल में डाल दिए है। विदित रहे कि इस विभाग में पहले ही कर्मचारियों की भारी कमी है। बावजूद इसके सरकार द्वारा 700 पद सरप्लस पूल में डाले गए हैं। यानी कि इन पदों पर दोबारा भर्तियां नहीं होगी।
वहीं, इस फैसले से नाराज चल रहे बिजली बोर्ड के कर्मचारियों द्वारा काले बिल्ले पहन प्रदर्शन किया जा रहा है। साथ में ये भी साफ किया है कि वे 10 से 5 बजे तक ही नौकरी करेंगे। वहीं इस विभाग के साथ ही दूसरे विभागों में आउटसोर्स पर पहले से नौकरी कर रहे दर्जनों कर्मचारियों को सरकार ने बाहर का रास्ता दिखाया है।
3 महीने पहले वित्त विभाग द्वारा एक अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें ये दावा किया गया था कि प्रदेश में 2 साल से खाली पड़े पदों को समाप्त किया जाता है। हालांकि सोशल मीडिया पर ये अधिसूचना जब वायरल हुई तो इसका विरोध करने के बाद सीएम सुक्खू ने सफाई देते हुए कहा था कि ऐसी कोई अधिसूचना जारी ही नहीं हुई है।
उधर, प्रदेश में बेरोजगार युवाओं की बढ़ती चिंताओं के बीच हिमाचल शिक्षित बेरोजगार संघ के अध्यक्ष बालकृष्ण ने राज्य सरकार पर आरोप लगाए हैं कि राज्य चयन आयोग ने नई भर्तियां नहीं निकाली हैं, जबकि बेरोजगार युवाओं की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने अब तक लगभग 9,036 लोगों को सरकारी नौकरी दी है, लेकिन इनमें ज्यादातर पदों के लिए चयन प्रक्रिया पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान की गई थी।
बालकृष्ण ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार ने ज्यादा तर आउटसोर्स और पार्ट-टाइम नौकरियों का वितरण किया है, जो अस्थाई और असुरक्षित हैं। उन्होंने सरकार से अस्थायी पॉलिसी के तहत दी जा रही नौकरियों की प्रथा को समाप्त करने और रेगुलर जॉब्स देने की मांग की।
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CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दावा किया था कि उनकी सरकार ने पिछले दो सालों में 40,000 से ज्यादा लोगों को सरकारी नौकरियां दी हैं, और अगले वित्तीय वर्ष में 20,000 से अधिक लोगों को रोजगार दिया जाएगा। हालांकि, विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस पार्टी ने आउटसोर्स भर्तियां बंद करने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद वह भी पूर्व सरकार के रास्ते पर चल पड़ी है। उधर, कैबिनेट ने 7,000 से अधिक पदों को भरने की स्वीकृति दे दी है, लेकिन इन भर्तियों का समय और नौकरियों की प्रक्रिया अभी तक अस्पष्ट बनी हुई है।