#राजनीति
February 8, 2025
हिमाचल के इन कर्मचारियों की उड़ी नींद- सरकार ने लिया ऐसा फैसला
सिनियोरिटी-फाइनेंशियल बैनिफिट नहीं मिलेगा
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को जोर का झटका लगा है। जिसके तहत 2003 के बाद से अनुबंध पर भर्ती कर्मचारियों को बैक डेट से सिनियोरिटी और वित्तीय लाभ नहीं दिए जाएंगे। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह निर्णय सरकार ने इस निर्णय को लागू कर दिया है। बता दें कि इसकी जानकारी को ई-गजट में प्रकाशित कर लागू कर दिया है।
बताते चलें कि यह विधेयक हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पारित किया गया था, हालांकि विपक्ष ने इसका कड़ा विरोध किया। वहीं CM सुखविंदर सिंह सुक्खू की अगुवाई में कांग्रेस सरकार ने इसे राज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा। राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद अब यह विधेयक प्रभावी हो गया है।
वहीं, इस विधेयक के पीछे एक बड़ी वजह हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश हैं। कोर्ट के आदेशों के कारण सरकार को अनुबंध कर्मचारियों को बैक डेट से वित्तीय लाभ और सिनियोरिटी देने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इससे सरकार पर करोड़ों रुपए का वित्तीय बोझ पड़ने लगा था। अब सरकार ने इस मुद्दे से निपटने के लिए विधेयक में संशोधन किया है, जिसके बाद कर्मचारियों को सिनियोरिटी और वित्तीय लाभ केवल उनकी रेगुलर नियुक्ति की तिथि से मिलेगा।
हिमाचल सरकार को यह भी चिंता थी कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद पिछले 21 वर्षों की सिनियोरिटी लिस्ट में बदलाव करना पड़ सकता था। अब नए विधेयक के लागू होने से कर्मचारियों को पहले के बजाय उनकी रेगुलर नियुक्ति की तिथि से सिनियोरिटी मिलेगी और अनुबंध सेवा के वर्षों को इस लिस्ट में शामिल नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि साल 2003 में जब अनुबंध पर भर्ती की नीति लागू की गई थी, तब अनुबंध की अवधि 8 साल थी। बाद में चुनावी साल 2007 में इसे घटाकर 6 साल, फिर 5 साल और अब 3 साल कर दिया गया था। इन बदलावों के बाद कई कर्मचारियों ने अदालतों का दरवाजा खटखटाया था और कुछ मामलों में कोर्ट ने कर्मचारियों को बैकडेट से सिनियोरिटी और वित्तीय लाभ देने का आदेश दिया था।
सरकार की कोशिश है कि इस विधेयक के जरिए वित्तीय संकट से राहत मिले, जबकि कर्मचारियों के लिए यह फैसला निराशाजनक साबित हो सकता है। अब से कर्मचारियों को बैक डेट से किसी भी तरह के लाभ का दावा नहीं किया जा सकेगा। इस निर्णय से सैकड़ों कर्मचारियों को तगड़ा झटका लगा है, लेकिन कांग्रेस सरकार को इस कदम से एक बड़ी वित्तीय राहत मिली है।
राज्यपाल से विधेयक की मंजूरी पाने के लिए CM सुक्खू राजभवन पहुंचे थे, जहां उन्होंने इस विधेयक को जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया। 24 घंटे के भीतर राज्यपाल ने इसे मंजूरी दे दी और इसके बाद सरकार ने इसे राजपत्र में प्रकाशित किया।