#राजनीति
January 30, 2025
कर्जदार हिमाचल! 1 लाख करोड़ के पार पहुंचा लोन, कैसे चलेगा विकास का पहिया?
सुक्खू सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने दी जानकारी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश का कर्ज अब 1 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर गया है। इसी के साथ कर्ज के तले दबे हिमाचल के तमाम जनता के लिए ये एक चिंताजनक खबर है। बता दें कि यह जानकारी शिमला में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने दी है। उन्होंने जनता के सामने कर्ज का ब्यौरा दिया।
तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि जब कांग्रेस की सुक्खू सरकार ने 11 दिसंबर 2022 को सत्ता संभाली, तो भाजपा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश पर 75,000 करोड़ रुपये का कर्ज था। इसके अलावा, 10,000 करोड़ रुपये की कर्मचारियों और पेंशनरों की देनदारियां भी कांग्रेस सरकार को विरासत में मिलीं, जिसके कारण राज्य का कर्ज और बढ़ा।
धर्माणी ने बताया कि प्रदेश सरकार ने इस कर्ज को कम करने के लिए कई सख्त फैसले लिए हैं, जिनके परिणामस्वरूप सरकार ने 2,631 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाया है। इसके अलावा, उन्होंने भाजपा के आरोपों का खंडन किया कि कांग्रेस सरकार बार-बार कर्ज ले रही है और उसे सही तरीके से उपयोग नहीं कर रही है। धर्माणी ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 30,000 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है, जिसमें से 9,337 करोड़ रुपये का कर्ज पूर्व भाजपा सरकार के दौरान लिए गए कर्ज को चुकता करने के लिए लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अब तक राज्य सरकार ने 18,854 करोड़ रुपये का कर्ज ब्याज सहित चुका दिया है, और यह कर्ज राज्य के विकास और लोगों की बेहतरी के लिए लिया जा रहा है।
मंत्री राजेश धर्माणी ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि जब वे सत्ता में थे, तो उन्होंने चुनावी वादे करके जनता को मुफ्त में रेवड़ियां बांटने का काम किया और अब कांग्रेस सरकार पर मुफ्त की योजनाओं को लागू करने का आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने राज्य के वित्तीय संकट को और बढ़ाया, जबकि कांग्रेस सरकार इसे सुधारने के लिए काम कर रही है।
राजेश धर्माणी ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि केंद्र हिमाचल के साथ सौतेला व्यवहार कर रहा है। उन्होंने बताया कि केंद्र से राज्य को आपदा राहत राशि अब तक नहीं मिली है और ओपीएस का 9,000 करोड़ रुपये का भुगतान भी नहीं किया गया। इसके अलावा, रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट में भी लगातार कटौती की जा रही है। धर्माणी ने उदाहरण दिया कि भाजपा सरकार के दौरान हिमाचल को 2021-22 में 10,249 करोड़ रुपये की रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट मिली थी, जो अब घटकर 6,259 करोड़ रुपये रह गई है, और 2025-26 तक यह घटकर 3,257 करोड़ रुपये रह जाएगी।