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February 1, 2026

केंद्रीय बजट हिमाचल के लिए ‘काला अध्याय', डगमगाएगा राज्य का अर्थतंत्र; जानें क्या बोले CM सुक्खू

केंद्र ने हिमाचल के हितों से किया खिलबाड़, 50 हजार करोड़ का होगा नुकसान

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Himachal cm

शिमला। केंद्रीय बजट 2026 27 हिमाचल प्रदेश के लिए राहत नहीं] बल्कि आर्थिक संकट की नई इबारत लेकर आया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) को समाप्त किए जाने को हिमाचल के इतिहास का “काला दिवस” करार देते हुए इसे छोटे और पहाड़ी राज्यों के साथ सीधा अन्याय बताया है। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि RDG का खत्म होना न सिर्फ हिमाचल की आर्थिक रीढ़ पर प्रहार है, बल्कि यह संघीय ढांचे की भावना के भी खिलाफ है।

50 हजार करोड़ का होगा घाटा

सीएम सुक्खू के अनुसार यदि 16वें वित्तायोग में RDG जारी रहती, तो हिमाचल को अगले पांच वर्षों में करीब 50 हजार करोड़ रुपये की सहायता मिल सकती थी। लेकिन बिना किसी पूर्व संकेत के इस अनुदान को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया, जिससे राज्य को गंभीर आर्थिक झटका लगा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ संवैधानिक और कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी और हिमाचल के हितों की लड़ाई हर मंच पर लड़ी जाएगी।

 

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वित्तीय आंकड़ों की बात करें तो 15वें वित्तायोग के दौरान हिमाचल को पांच वर्षों में 39,127 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा अनुदान मिला था। यही राशि प्रदेश के आय-व्यय के अंतर को पाटने में सहारा बनती थी। अब 16वें वित्तायोग में इसे पूरी तरह बंद कर दिए जाने से आने वाले पांच वर्षों में राज्य के सामने वेतन, पेंशन और विकास कार्यों को लेकर भारी संकट खड़ा हो गया है।

भाजपा सांसदों ने नहीं की हिमाचल की पैरवी

मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य कभी भी पूरी तरह राजस्व सरप्लस नहीं हो सकते। प्रदेश का केवल करीब 10 प्रतिशत क्षेत्र ही औद्योगिक गतिविधियों के लिए उपलब्ध है और जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के कर अधिकार भी सीमित हो गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि RDG के मुद्दे पर भाजपा के सांसदों ने प्रदेश के हितों की मजबूती से पैरवी नहीं की।

 

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केंद्रीय बजट में हिमाचल के लिए माउंटेन ट्रेल्स विकसित करने जैसी घोषणाएं जरूर की गईं, लेकिन मुख्यमंत्री ने इन्हें “बिना बजट और समय सीमा की खोखली घोषणाएं” बताया। उन्होंने कहा कि जब तक केंद्र सरकार स्पष्ट फंडिंग और टाइमलाइन तय नहीं करती, तब तक ऐसी घोषणाएं कागजों से आगे नहीं बढ़ेंगी।

हिमाचल को उसके संसाधनों का भी नहीं मिल रहा लाभ

सीएम सुक्खू ने यह भी कहा कि हिमाचल उत्तर भारत का “वॉटर टॉवर” है। प्रदेश से निकलने वाली नदियों पर 15 हजार मेगावॉट से अधिक जलविद्युत क्षमता विकसित की जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद राज्य को अपने संसाधनों का पूरा लाभ नहीं मिल रहा। जिन जलविद्युत परियोजनाओं की लागत पूरी हो चुकी है, उनमें राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाई जानी चाहिए।

 

आपदा प्रबंधन को लेकर भी मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 2023–24 में प्रदेश ने अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदाओं का सामना किया। राज्य सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से प्रभावित परिवारों को राहत दी, लेकिन केंद्र से सहायता बहुत देर से और बेहद कम मिली। दो वर्षों के बाद केवल 1,500 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए, जिनमें से वास्तविक रूप से करीब 1,000 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए।

 

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आपदा राशि मे भी की कटौती

वित्तायोग की रिपोर्ट में स्थानीय निकायों और आपदा प्रबंधन के लिए मिलने वाली राशि में भी कटौती की गई है। अगले पांच वर्षों में पंचायतों और शहरी निकायों को कुल 4,250 करोड़ रुपये मिलेंगे, जबकि आपदा प्रबंधन के लिए 2,650 करोड़ रुपये की राशि तय की गई है, जो पहले से कम है।

 

कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2026 और 16वें वित्तायोग की सिफारिशें हिमाचल प्रदेश के लिए आर्थिक अस्थिरता, सीमित विकल्प और कठिन फैसलों का संकेत दे रही हैं। मुख्यमंत्री सुक्खू ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई केवल पैसों की नहीं, बल्कि हिमाचल के अधिकारों और संघीय संतुलन की लड़ाई है—और इसे आखिरी दम तक लड़ा जाएगा।

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