#राजनीति
April 12, 2026
सीएम सुक्खू का तंज: तनाव में हैं जयराम, अपनों से कुर्सी बचाने की जद्दोजहद कर रहे नेता प्रतिपक्ष
मुख्यमंत्री सुक्खू का दावा, जयराम ठाकुर के बयान उनकी हताशा का प्रतीक
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश की सियासत इन दिनों शिमला की बर्फीली हवाओं के बीच भी अंगारे उगल रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग इस कदर तेज हो गई है कि व्यक्तिगत कटाक्ष और राजनीतिक भविष्यवाणियों का दौर शुरू हो चुका है। ताज़ा घटनाक्रम में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच की तल्खी ने प्रदेश के सियासी पारे को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों मर्यादाओं की दीवारें लांघी जा रही हैं। कभी जयराम ठाकुर कांग्रेस के 'सूपड़ा साफ' होने की भविष्यवाणी करते हैं, तो कभी मुख्यमंत्री सुक्खू उन्हें 'तनावग्रस्त' बताकर उनके राजनीतिक वजूद पर सवाल खड़े कर देते हैं। कुल्लू पहुंचे मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने नेता प्रतिपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है।
जयराम ठाकुर द्वारा आगामी चुनावों में कांग्रेस की हार के दावों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष इन दिनों भारी मानसिक और राजनीतिक दबाव में हैं। सुक्खू ने दावा किया कि जयराम ठाकुर के बयान उनकी हताशा का प्रतीक हैं। जयराम ठाकुर आजकल जो बयान दे रहे हैं] वह तनाव में दे रहे हैं। उन्हें पता है कि भाजपा के भीतर उनके खिलाफ खिचड़ी पक रही है और कई नेता उन्हें नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाने की तैयारी में हैं।
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मुख्यमंत्री ने भाजपा के आंतरिक संकट पर चुटकी लेते हुए कहा कि हिमाचल भाजपा फिलहाल पांच अलग-अलग गुटों में बंटी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि जयराम ठाकुर जनता की लड़ाई लड़ने के बजाय अपनी कुर्सी बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। सुक्खू के अनुसार भाजपा के भीतर एक बड़ा धड़ा उन्हें पद से बेदखल करना चाहता है, जिसके कारण वह अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कांग्रेस पर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तो यहां तक कहा है कि विपक्ष के नेता और कार्यकर्ता जमीनी मुद्दों के बजाय सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। अपने कार्यालयों में लोगों को बैठा कर लगातार सोशल मीडिया पर सरकार के खिलाफ प्रचार किया जा रहा है। सीएम सुक्खू ने दावा किया कि कठिन परिस्थितियों, विशेषकर आपदा के समय, उन्होंने जनता के साथ खड़े होकर काम किया है।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच विकास कार्यों और केंद्र-राज्य समन्वय को लेकर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। सत्तापक्ष का कहना है कि प्रदेश हितों के मुद्दों पर विपक्ष का सहयोग अपेक्षित स्तर पर नहीं मिला, जबकि विपक्ष लगातार सरकार के दावों पर सवाल उठा रहा है।
कुल मिलाकर, हिमाचल की राजनीति इन दिनों आरोपों की इस जंग के चलते और अधिक गरमा गई है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाकर राजनीतिक बढ़त हासिल करने की कोशिश में हैं। आने वाले समय में यह सियासी टकराव और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे प्रदेश की राजनीति में हलचल बनी रहना तय है।