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October 13, 2026

वोट ही नहीं... सरकार गिराकर विधायक भी चुराती है भाजपा ! सीएम सुक्खू का BJP पर तीखा वार

सीएम सुक्खू के बयान ने हिमाचल में 2024 के राज्यसभा चुनाव की यादें की ताजा

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शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए वोट चोरी से लेकर चुनी हुई सरकारों को गिराने तक के गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली में सोमवार को इंडिया गठबंधन की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा केवल वोट चोरी ही नहीं करती, बल्कि सरकार गिराकर विधायकों की भी चोरी करती है।

 

मुख्यमंत्री के इस बयान ने हिमाचल प्रदेश की सियासत में उस घटनाक्रम की याद भी ताजा कर दी, जब वर्ष 2024 में राज्यसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के छह विधायकों ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया था और प्रदेश की सुक्खू सरकार के सामने राजनीतिक संकट खड़ा हो गया था। हालांकि, मुख्यमंत्री ने दिल्ली में दिए गए बयान में किसी विशेष घटनाक्रम का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके आरोपों को हिमाचल के उस सियासी घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा सकता है।

 

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भाजपा वोट के साथ विधायक भी चुराती है

दिल्ली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने भाजपा पर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने करीब दो वर्ष पहले वोट चोरी का मुद्दा उठाया था और कांग्रेस लगातार इस विषय पर आवाज बुलंद कर रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक भाजपा पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोपों के साथ-साथ चुनी हुई सरकारों को गिराने के प्रयासों का मुद्दा भी गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा वोट चोरी के बाद सरकार गिराकर विधायकों को अपने पाले में लाने का काम भी करती है।

 

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हिमाचल के राज्यसभा चुनाव की सियासत फिर चर्चा में

सुक्खू के बयान का राजनीतिक महत्व हिमाचल प्रदेश के वर्ष 2024 के घटनाक्रम के संदर्भ में और बढ़ जाता है। उस समय राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक मनु सिंघवी को भाजपा के हर्ष महाजन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। मतदान के दौरान कांग्रेस के छह विधायकों ने भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया था।

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इसके बाद इन विधायकों ने विधानसभा में बजट से जुड़े मतदान के दौरान भी पार्टी के रुख के विपरीत कदम उठाया। आगे चलकर छह बागी विधायक भाजपा में शामिल हो गए। इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश में कांग्रेस सरकार के बहुमत और स्थिरता को लेकर बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हो गया था। ऐसे में मुख्यमंत्री का विधायकों की कथित ‘चोरी’ वाला बयान विपक्षी दलों के बीच जारी राजनीतिक टकराव के संदर्भ में देखा जा रहा है।

SIR के खिलाफ दिल्ली में इंडिया गठबंधन का प्रदर्शन

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के मुद्दे पर सोमवार को नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन के प्रदर्शन में मुख्यमंत्री सुक्खू ने भी भाग लिया। उनके साथ हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार और पार्टी के अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और केंद्रीय चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध जताते हुए चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष की चिंताओं को सामने रखना था।

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हिमाचल भवन के बाहर भी कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन

दिल्ली पहुंचे हिमाचल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हिमाचल भवन के बाहर भी प्रदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि जब लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठते हैं, तो देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते कांग्रेस की जिम्मेदारी है कि वह आवाज उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की ओर से वोट चोरी का मुद्दा उठाए जाने के बावजूद विपक्ष की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया गया। कांग्रेस नेताओं ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग करते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की।

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लोकतंत्र और संविधान की रक्षा कांग्रेस की जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और संवैधानिक संस्थाओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं गलत हो रहा है, तो विपक्ष को उसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। उनके मुताबिक, कांग्रेस की लड़ाई किसी एक राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए है। उन्होंने यह भी कहा कि आवाज दबाने की कोशिशों से विरोध खत्म नहीं होता, बल्कि कई बार इससे लोगों का संकल्प और मजबूत होता है।

हिमाचल से दिल्ली तक कांग्रेस नेताओं की जुटान

दिल्ली में हुए प्रदर्शन के लिए हिमाचल प्रदेश से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के पहुंचने का सिलसिला रविवार से ही शुरू हो गया था। सोमवार को मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और प्रदेश कांग्रेस के पदाधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया। हिमाचल भवन के बाहर प्रदर्शन के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च में भी शामिल हुए। इस दौरान पार्टी ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की।

 

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सुक्खू के बयान से गरमाई प्रदेश की राजनीति

मुख्यमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं। वर्ष 2024 के राज्यसभा चुनाव के बाद पैदा हुए संकट ने प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक हलचल बनाए रखी थी। अब दिल्ली में भाजपा पर वोट और विधायकों की चोरी के आरोप लगाकर सुक्खू ने एक बार फिर लोकतंत्र, चुनावी निष्पक्षता और सरकारों की स्थिरता को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, मुख्यमंत्री के ताजा बयान में हिमाचल के राज्यसभा चुनाव का सीधा उल्लेख नहीं था, लेकिन प्रदेश के राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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