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October 13, 2026

हिमाचल के इस मेडिकल कॉलेज में रैगिंग! जूनियर छात्र को किया प्रताड़ित; 7 सीनियर पर गिर सकती है गाज

हमीरपुर के मेडिकल कॉलेज का मामला, एंटी-रैगिंग कमेटी कर रही जांच

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medical collage hamirpur

हमीरपुर। देवभूमि हिमाचल प्रदेश के एक प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में रैगिंग का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (हमीरपुर) में एमबीबीएस प्रथम वर्ष का एक छात्र अपने सीनियरों की कथित प्रताड़ना का शिकार हो गया है। इस घटना के सामने आने के बाद हॉस्टलों में रहकर पढ़ाई कर रहे अन्य छात्रों के परिजनों में भी गहरी चिंता और खौफ का माहौल बन गया है।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार पीड़ित छात्र राज्य से बाहर (अन्य प्रदेश) का निवासी है। आरोप है कि शनिवार को एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के सीनियर छात्रों ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया और उसे गंभीर रूप से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। हालांकि, अभी तक इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि घटनाक्रम में वास्तव में क्या हुआ था और किन छात्रों की भूमिका रही।

 

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सात सीनियर छात्रों की भूमिका पर संदेह

इस मामले में एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के लगभग सात छात्रों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। कॉलेज प्रशासन शिकायत में लगाए गए आरोपों और संबंधित विद्यार्थियों की भूमिका की पड़ताल कर रहा है। फिलहाल किसी भी छात्र को दोषी घोषित नहीं किया गया है। जांच के दौरान सभी संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है।

एंटी-रैगिंग कमेटी ने बंद कमरे में की पूछताछ

घटना के सामने आते ही कॉलेज प्रशासन हरकत में आ गया है। संस्थान को इस संदर्भ में ई-मेल के माध्यम से एक गुमनाम शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद विभागीय जांच बेहद तेज कर दी गई है। सोमवार को कॉलेज की 'एंटी रैगिंग कमेटी' की एक आपात और महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

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जांच के दौरान संदेह के घेरे में आए लगभग 7 सीनियर छात्रों को एक-एक करके कमेटी के समक्ष तलब किया गया। एंटी-रैगिंग कमेटी ने बंद कमरे में इन सभी छात्रों से कड़ाई से पूछताछ की और उनके लिखित बयान दर्ज किए। फिलहाल कमेटी इस पहलू की भी जांच कर रही है कि यह कथित घटना कॉलेज परिसर या हॉस्टल के भीतर हुई अथवा परिसर से बाहर किसी निजी किराए के कमरे में।

आरोप सिद्ध हुए तो सीधे हो सकता है निष्कासन

मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रमेश भारती ने स्पष्ट किया है कि संस्थान में रैगिंग को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
हमें ई-मेल के जरिए शिकायत मिली थी, जिस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी गई है।

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एंटी रैगिंग कमेटी पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ मामले के हर पहलू की छानबीन कर रही है। यदि जांच रिपोर्ट में कोई भी छात्र दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। दोषी पाए जाने वाले छात्रों को कॉलेज से निष्कासित भी किया जा सकता है।

परिजनों में बढ़ी चिंता

इस घटना के बाद से ही मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मचा हुआ है। दूर-दराज के राज्यों और जिलों से अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने के सपने के साथ भेजने वाले अभिभावक इस खबर के बाद से असहज महसूस कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि शैक्षणिक संस्थानों में इस प्रकार का माहौल नवआगंतुक छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।

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फिलहाल, पूरी जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। यदि जांच में आरोप पूरी तरह से सही साबित होते हैं, तो प्रताड़ना के आरोपी सात सीनियर छात्रों का करियर दांव पर लग सकता है और उन पर कॉलेज से निष्कासन (Rustication) की गाज गिरना तय माना जा रहा है।

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