#राजनीति
November 27, 2025
पंचायत चुनाव पर बोले सीएम सुक्खू - स्टेट EC पर भी लागू होगा डिजास्टर एक्ट, विपक्ष ने किया वॉकआउट
हिमाचल विधानसभा में पंचायत चुनाव पर गरमाया सियासी तापमान
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज दूसरे दिन सत्ता पक्ष और विपक्ष की नोकझों की भेंट चढ़ गया। सुबह से ही विपक्ष अक्रामक मूढ़ में सदन के अंदर पहुंचा। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोक भी हुई। दोपहर बाद पंचायत चुनाव को लेकर सीएम सुक्खू के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।
दरअसल हिमाचल विधानसभा के विंटर सेशन में पंचायत चुनाव देरी के मुद्दे पर पिछले दो दिनों से चल रही बहस गुरुवार को और तेज हो गई। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चर्चा का जवाब देते हुए बड़ा ऐलान करते हुए स्पष्ट कहा कि आज से स्टेट इलेक्शन कमीशन पर भी डिजास्टर एक्ट के प्रावधान लागू होंगे, और डिजास्टर एक्ट हटने के बाद ही हिमाचल में पंचायत चुनाव करवाए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह जैसे ही अपना विस्तृत जवाब दे रहे थे, विपक्ष उनके तर्कों से असंतुष्ट दिखा और पूरा जवाब सुने बिना ही सदन से वॉकआउट कर गया। इससे एक बार फिर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव साफ नजर आया। विपक्ष सदन से नारेबाजी करते हुए बाहर चला गया। लेकिन सीएम सुक्खू ने अपना जवाब जारी रखा। सीएम सुक्खू ने कहा कि चुनाव से पहले पंचायतों का पुनर्गठन बौर वार्डबंदी जरूरी है, इसके बिना चुनाव करवाना संभव नहीं है।
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सीएम सुक्खू ने सदन में बताया कि पंचायत चुनावों के पुनर्गठन और वार्डबंदी की प्रक्रिया अभी जारी है। प्रदेश में कई ऐसी पंचायतें हैं, जहां की आवादी 9 हजार से भी अधिक है। ऐसे में नई पंचायतों का गठन किये बिना पंचायत चुनाव करवाना संभव नहीं है। सीएम सुक्खू ने बताया कि इससे पहले जून माह में पंचायतों के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन प्राकृतिक आपदा के चलते यह कार्य स्थगित करना पड़ा था।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायतों का कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ है, और जनवरी तक चुनाव कराए जा सकते हैं। उन्होंने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने भी अपने कार्यकाल में नई पंचायतें बनाई थीं, जिससे प्रक्रिया प्रभावित हुई थी।
इससे पहले बुधवार को विपक्ष ने पंचायत चुनाव में देरी के खिलाफ काम रोको प्रस्ताव लाकर सरकार को घेरा था। सरकार ने चर्चा के लिए सहमति दी, जिसके बाद दो दिनों तक इस मुद्दे पर गरमागरम बहस चली। लेकिन सीएम के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने कहा कि सरकार चुनाव कराने में गंभीर नहीं हैए इसलिए वे वॉकआउट कर रहे हैं।
चर्चा के दौरान सदन में एक और विवाद खड़ा हो गया। जब राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर आमने-सामने आ गए। नेगी ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन के दौरान प्रदेश कबाड़ बन गया था। इस बयान पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। स्थिति बिगड़ते देख विधानसभा की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करना पड़ा। विपक्ष ने इसके बाद घोषणा की कि वे विंटर सेशन की शेष बैठकों में मंत्री जगत नेगी का बायकॉट करेंगे। मानसून सत्र में भी विपक्ष ने ऐसा ही कदम उठाया था।