#हादसा

May 6, 2026

हिमाचल में बड़ा हा..दसा: पहाड़ी से गिरे मलबे में दफन हो गए दो वाहन; चीख पुकार से दहला इलाका

ग्रामीणों ने खदान के मलबे को गलत तरीके से डंप करने के लगाए आरोप

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himachal Nahan Landslide

नाहन। हिमाचल प्रदेश में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश भर में हो रही मूसलाधार बारिश अब आम जनजीवन के लिए काल बन कर टूटने लगी है। जहां एक ओर इस बेमौसम बरसात ने राज्य के किसानों और बागवानों की कमर तोड़ कर रख दी है और फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है, वहीं दूसरी ओर अब भारी बारिश के कारण हो रहे भूस्खलन लोगों की जान के दुश्मन बन गए हैं। इसी बीच हिमाचल के सिरमौर जिला से एक बेहद खौफनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां पहाड़ी से आए मलबे के सैलाब ने दो वाहनों को अपनी आगोश में ले लिया।

मलबे में दबे दो वाहन

प्राप्त जानकारी के अनुसार यह दर्दनाक वाकया सिरमौर जिला के संगड़ाह उपमंडल का है। संगड़ाह मुख्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित वालिया लाइमस्टोन (चूना पत्थर) खदान एक बार फिर स्थानीय लोगों के लिए आपदा का सबब बन गई। क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद इस खदान से हजारों टन मलबा और पत्थर ताश के पत्तों की तरह ढह कर नीचे आ गिरे। मलबे का बहाव इतना तेज था कि सड़क किनारे खड़ी एक कार और एक बाइक पूरी तरह से मलबे के नीचे दफन हो गईं।

 

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वाहन से कूद कर बचाई जान

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मलबे को आता देख वाहनों में सवार लोगों के होश उड़ गए और उन्होंने फुर्ती दिखाते हुए वाहनों से कूदकर भाग कर अपनी जान बचाई। गनीमत यह रही कि समय रहते वे बाहर निकल आए, अन्यथा एक बड़ा और भयावह हादसा हो सकता था जिसमें जनहानि निश्चित थी। इस घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दोनों वाहन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।

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अवैध डंपिंग ने बढ़ाई मुसीबत

इस हादसे के बाद स्थानीय निवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। ग्रामीणों ने खदान प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि खदान से निकलने वाले हजारों मीट्रिक टन मलबे को नियमों को ताक पर रखकर संगड़ाह-श्रीरेणुकाजी-नाहन मुख्य मार्ग के ठीक ऊपर अवैध रूप से डंप किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। हर बार बारिश के दौरान यही मंज़र देखने को मिलता है। ज़रा सी बरसात होते ही खदान का मलबा बहकर सड़क पर आ जाता है, जिससे न केवल यातायात बाधित होता है बल्कि राहगीरों की जान पर भी हर वक्त खतरा मंडराता रहता है।

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ग्रामीणों ने रोष प्रकट करते हुए कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद न तो संबंधित विभाग (खनन एवं लोक निर्माण विभाग) और न ही जिला प्रशासन इस पर कोई ठोस कार्रवाई कर रहा है, जिससे खदान माफिया के हौसले बुलंद हैं। स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से अविलंब इस अवैध डंपिंग पर रोक लगाने और समस्या का स्थायी समाधान खोजने की मांग की है।

 

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8 मई तक मौसम रहेगा खराब

हिमाचल वासियों के लिए मुसीबतें अभी कम होने वाली नहीं हैं। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, प्रदेश में मौसम के तेवर अभी कड़े ही रहेंगे। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि हिमाचल प्रदेश में अभी आठ मई तक मौसम से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।

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