#राजनीति
February 17, 2026
अफसरशाही से त्रस्त CM सुक्खू के विधायक: बजट सत्र में फूटा गुस्सा, अफसरों पर "डंडा" चलाने की मांग
सदन में विधायक ने दी चेतावनी: बोले- मेरा दिमाग सरका तो धरने पर बैठ जाउंगा
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार के कार्यकाल में अफसरशाही के बेलगाम होने के आरोप अब खुलकर सामने आने लगे हैं। हैरानी की बात यह है कि विपक्ष ही नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायक भी अधिकारियों की कार्यशैली से असंतुष्ट नजर आ रहे हैं और खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन के भीतर वह गुबार फूट ही गया, जो लंबे समय से कांग्रेस विधायकों के भीतर सुलग रहा था। गगरेट से कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने अफसरों की मनमानी का कच्चा चिट्ठा खोलते हुए मुख्यमंत्री से सख्त कदम उठाने की मांग की है।
बजट सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही के दौरान गगरेट के विधायक राकेश कालिया ने बेहद तल्ख तेवर अपनाए। उन्होंने सीधे तौर पर अधिकारियों पर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप लगाया। कालिया ने कहा कि अधिकारी विधायकों के फोन तक नहीं उठाते। यह हमारा व्यक्तिगत काम नहीं, बल्कि जनता का काम होता है। अगर मेरा दिमाग सरका, तो मैं 300 लोगों को साथ लेकर ऐसे अधिकारियों के खिलाफ धरने पर बैठ जाऊंगा।
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विधायक ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से अपील की कि वे ऐसे बेलगाम अधिकारियों के खिलाफ डंडा पकड़ें और सख्ती दिखाएं। इस तीखी बहस पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि मामला गंभीर है और विधायक को ऐसे अधिकारियों की सूची सदन को देनी चाहिए ताकि कार्रवाई की जा सके।
यह पहला मौका नहीं है जब प्रदेश में अफसरशाही पर मनमानी के आरोप लगे हों। इससे पहले भी सुक्खू सरकार के कार्यकाल में कई मंत्री सार्वजनिक मंचों से अधिकारियों को फटकार लगाते दिखाई दिए हैं। प्रदेश के डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने भी कई मौकों पर अधिकारियों को कार्यशैली सुधारने की नसीहत दी है। वहीं लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने गैर.हिमाचली अधिकारियों को लेकर बयान दिया था, जिस पर काफी राजनीतिक हलचल मची थी। उनके बयान के बाद आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी थी।
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इसी क्रम में एक अन्य मामले में मंत्री यादवेंद्र गोमा ने मंडी के उपायुक्त के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था। आरोप था कि गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर प्रोटोकॉल के तहत मंत्री की अगुवाई के लिए डीसी उपस्थित नहीं हुए। यह घटनाक्रम भी प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बढ़ती दूरी का संकेत माना गया।
बजट सत्र के दूसरे दिन सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। प्रश्नकाल से पहले नेता प्रतिपक्ष जय राम ठाकुर ने प्वाइंट ऑफ ऑर्डर के तहत नेवा पोर्टल के न चलने का मुद्दा उठाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली। विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट किया कि नेवा केंद्र सरकार का पोर्टल है और इसकी तकनीकी दिक्कतों का मामला केंद्र के समक्ष उठाया गया है। सदस्यों को हो रही परेशानी को देखते हुए विधानसभा ने अपनी ई.विधान प्रणाली दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है।
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सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार के सामने अब यह चुनौती है कि वह प्रशासनिक ढांचे में तालमेल कैसे स्थापित करे। जब सत्ता पक्ष के विधायक ही अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाने लगें तो यह संकेत है कि व्यवस्था में कहीं न कहीं संवाद की कमी है।