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December 3, 2025

लोकसभा में बोले अनुराग: रुक गया है काम- जमीन और पैसा नहीं दे रही है राज्य सरकार

अनुराग ठाकुर ने दी हिमाचल सरकार को सलाह

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Anurag Thakur

दिल्ली/शिमला। हिमाचल प्रदेश से जुड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स की धीमी रफ्तार से नाराजगी की गूंज एक बार फिर लोकसभा सदन में गूंजी। जहां हमीरपुर से सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने हिमाचल में चल रही रेल लाइन परियोजनाओं में हो रही देरी पर गंभीर ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया कि, प्रदेश सरकार अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं कर रही है। जिसकी वजह से कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं लगातार अटक रही हैं।

अनुराग ठाकुर ने दी सलाह

सांसद अनुराग ठाकुर ने लोकसभा सदन से सुक्खू राज्य सरकार से आग्रह करते हुए कहा कि, राज्य का लंबित वित्तीय हिस्सा तुरंत जारी किया जाए। जिस भूमि का अधिग्रहण अभी बाकी है उसे जल्द से जल्द सौंपा जाए और कानूनी मंजूरियों के लिए तेज़ प्रक्रिया चलाई जाए।

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साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि केंद्र, राज्य और रेलवे अधिकारियों का एक संयुक्त मॉनीटरिंग सेल बनाया जाए, जो हर 15 दिन में बैठक कर प्रगति की समीक्षा करे और परियोजनाओं को रफ्तार देने के लिए ज़रूरी फैसले तुरंत ले।

रेल मंत्रालय ने भी चिंता जताई

सांसद अनुराग ठाकुर के सवाल के जवाब में रेल मंत्रालय ने लिखित रूप से स्वीकार किया कि, हिमाचल सरकार की ओर से समय पर सहयोग न मिलना, तय हिस्सेदारी न जमा कराना और भूमि उपलब्ध कराने में देरी, इन सभी कारणों से प्रोजेक्ट्स की गति प्रभावित हुई है। मंत्रालय के अनुसार, कई योजनाएं ऐसी हैं जो निर्धारित समय में पूरी हो सकती थीं,

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लेकिन राज्य सरकार के ढीले रवैये के चलते काम आगे नहीं बढ़ सका। मंत्रालय ने बताया कि परियोजनाओं के लिए कुल 124.02 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता थी, लेकिन अभी तक सिर्फ 82 हेक्टेयर जमीन ही राज्य से प्राप्त हो पाई है। स्पष्ट है कि निर्माण केवल उसी भूमि पर हो रहा है जो राज्य ने पहले से उपलब्ध करा दी है, जबकि बाकी हिस्सों पर काम पूरी तरह अटका हुआ है।

सामरिक दृष्टि से अहम रेल लाइन भी प्रभावित

सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि, देश की सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाने वाली भानुपल्ली–बिलासपुर–बेरी रेललाइन पर भी यही स्थिति बनी हुई है। प्रोजेक्ट को केंद्र और राज्य के बीच लागत-साझेदारी मॉडल पर मंजूरी मिली थी।

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अब तक इस लाइन पर 5,252 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि राज्य सरकार का 1,843 करोड़ का हिस्सा अभी तक लंबित है। मंत्रालय का कहना है कि जब तक यह राशि रिलीज नहीं की जाती, तब तक कई प्रमुख हिस्सों पर निर्माण आगे नहीं बढ़ सकेगा।

अन्य नई लाइन परियोजनाओं की स्थिति

हिमाचल में कुल 214 किलोमीटर लंबाई की तीन नई रेल लाइन परियोजनाएँ स्वीकृत हैं, जिन पर 17,622 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होने का अनुमान है। इनमें से लगभग 64 किलोमीटर रास्ता पहले ही चालू किया जा चुका है और 8,280 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। लेकिन गति अभी भी अपेक्षित स्तर से काफी धीमी बताई जा रही है।

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