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November 15, 2025

अधिकारी चला रहे सुक्खू सरकार; उनके आगे बेबस हैं CM, हाईकोर्ट की टिप्पणी पर बोले जयराम

हाईकोर्ट की टिप्पणी ने सरकार की नाकामी, अफसरों की मनमानी को किया उजागर

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Jairam comment on cm sukhu

शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर की गई तीखी टिप्पणियों ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। कोर्ट ने सरकार के कामकाज को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि शासन व्यवस्था ऐसे चल रही है जैसे राज्य नहीं, कोई पंचायत चलाई जा रही हो। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद विपक्ष ने सुक्खू सरकार को आड़े हाथों लिया है।

सुक्खू सरकार खो चुकी है प्रशासनिक नियंत्रण

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार पूरी तरह प्रशासनिक नियंत्रण खो चुकी है और अधिकारियों की मनमानी के आगे मुख्यमंत्री असहाय दिखाई दे रहे हैं। जयराम ठाकुर ने कहा कि कोर्ट की टिप्पणियां इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार दिशा.विहीन है और प्रशासनिक ढांचा बिखर चुका है। पिछले कई महीनों से अधिकारी बिना किसी जवाबदेही के फैसले ले रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री न तो उन्हें नियंत्रित कर पा रहे हैं, और न ही जवाबदेह बना पा रहे हैं।  स्थिति ऐसी हो गई है कि अधिकारी यह तय कर रहे हैं कि सरकार कैसे चलेगी। 

 

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अधिकारी अपने हिसाब से कर रहे काम

जयराम ठाकुर ने कहा कि विपक्ष के विधायकों को तो छोड़ो अधिकारी अब सत्ता पक्ष के विधायकों की भी नही सुन रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने कुछ अधिकारियों को इतना संरक्षण दे दिया कि अब वही अधिकारी सरकार की कमजोर नस पकड़कर अपने हिसाब से काम कर रहे हैं। सरकार खुद मान रही है कि अधिकारी उनकी नहीं सुन रहे, यह सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।

 

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आउटसोर्स भर्ती पर बड़ा आरोप

जयराम ठाकुर ने आउटसोर्स भर्ती एजेंसियों के चयन को लेकर भी बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रियाओं में लापरवाही और मनमर्जी से नियम बनाए जा रहे हैं। आरोप लगाया गया कि कुछ अधिकारी अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए नियमों को तोड़.मरोड़ रहे हैं। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि कभी फिनाइल बेचने वाली कंपनियों को नर्सों की भर्ती पकड़ा दी जाती है, तो कभी उससे भी बड़ी गड़बड़ियां सामने आती हैं। 

 

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सीएम के पास न स्थायी मुख्य सचिव तक नहीं

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि प्रशासनिक अस्थिरता ऐसी है कि मुख्यमंत्री तीन साल में अब तक स्थायी मुख्य सचिव और स्थायी डीजीपी तक नियुक्त नहीं कर पाए। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर व्यवस्था पतन हुआ है। सरकार चलाने की बजाय आज अधिकारी सरकार चला रहे हैं।

 

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हाईकोर्ट की टिप्पणी से सियासत हुई तेज

हाईकोर्ट द्वारा सरकार की कार्यशैली पर लगातार की जा रही कड़ी टिप्पणियों ने विपक्ष को बड़ा राजनीतिक मुद्दा पकड़ा दिया है। पहले कोर्ट ने सरकार को दूरदर्शी सोच के बिना काम करने वाली सरकार बताया था और हाल ही में कहा कि कामकाज से यह पता ही नहीं चलता कि सरकार प्रदेश चला रही है या पंचायत। इन टिप्पणियों के बाद विपक्ष ने सुक्खू सरकार को शासन और प्रशासन दोनों स्तरों पर विफल करार देना शुरू कर दिया है।

 

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