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March 22, 2026

हिमाचल में AAP ने भी बिछाई सियासी बिसात: 2027 विस चुनाव में भाजपा-कांग्रेस को देगी टक्कर

मनीष सिसोदिया ने कार्यकर्ताओं में भरा जोश, टटोली नब्ज

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AAP Mandi

मंडी। हिमाचल प्रदेश में आगामी 2027 विधानसभा चुनावों से पहले सियासी पारा चढ़ने लगा है। प्रदेश की पारंपरिक दो प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के लिए इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता नजर आ रहा है। इसकी बड़ी वजह जहां एक ओर दोनों दलों के भीतर असंतोष और रूष्ट नेताओं की सक्रियता है] वहीं दूसरी ओर तीसरे मोर्चे की हलचल और आम आदमी पार्टी की एंट्री ने राजनीतिक समीकरणों को बदलने के संकेत दे दिए हैं।

रूष्ट नेताओं की सक्रियता

सूत्रों के मुताबिक भाजपा और कांग्रेस के भीतर लंबे समय से उपेक्षित महसूस कर रहे कई दिग्गज नेता अब एकजुट होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। अंदरखाते इसको लेकर बैठकों का दौर जारी है और तीसरे मोर्चे के गठन की रणनीति पर गंभीर मंथन चल रहा है। यदि यह प्रयास सफल होता है तो यह दोनों राष्ट्रीय दलों के पारंपरिक वोट बैंक में बड़ी सेंध लगा सकता है।

 

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AAP ने भी किया सियासी आगाज

इसी बीच आम आदमी पार्टी ने भी हिमाचल में अपने इरादे साफ कर दिए हैं। मनीष सिसोदिया ने आज मंडी जिला से 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हुंकार भर दी है। उनके मंडी दौरे ने यह संकेत दे दिया है कि पार्टी अब प्रदेश में अपनी जमीन मजबूत करने के लिए सक्रिय हो चुकी है। राज्य स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए पार्टी ने न केवल संगठन को मजबूत करने का संदेश दिया, बल्कि 2027 के चुनावों में पूरी ताकत से उतरने का ऐलान भी किया।

 

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हिमाचल में दिल्ली-पंजाब मॉडल

सिसोदिया ने साफ किया कि दिल्ली और पंजाब में मिले जनसमर्थन के बाद अब हिमाचल अगला लक्ष्य है। शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं को आधार बनाकर पार्टी प्रदेश में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रही है। AAP का मानना है कि प्रदेश की जनता अब पारंपरिक राजनीति से अलग विकल्प की तलाश में है।

कांग्रेस-भाजपा के लिए डबल चुनौती

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय हो सकता है। एक ओर जहां कांग्रेस को सत्ता विरोधी लहर और अंदरूनी असंतोष का सामना करना पड़ सकता है, वहीं भाजपा भी संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती से जूझ रही है। ऐसे में तीसरे मोर्चे और AAP की सक्रियता दोनों ही दलों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।

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संगठन विस्तार और रणनीति पर जोर

AAP ने प्रदेशभर में संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियान तेज करने की योजना बनाई है। मंडी में आयोजित सम्मेलन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी ने यह संकेत दिया है कि पार्टी जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है।

बदलते समीकरणों के बीच दिलचस्प होगा मुकाबला

कुल मिलाकर, हिमाचल प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव पारंपरिक मुकाबले से हटकर एक नए राजनीतिक परिदृश्य की ओर बढ़ता दिख रहा है। तीसरे मोर्चे की संभावनाएं, AAP की सक्रियता और दोनों बड़ी पार्टियों के भीतर की हलचल आने वाले समय में सियासी तस्वीर को पूरी तरह बदल सकती है।

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