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June 23, 2026

हिमाचल की इन देवी मां से राजा वीरभद्र ने मांगी संतान की मुराद, विक्रमादित्य के रूप में हुई थी पुत्र प्राप्ति

11,000 फीट ऊंचाई पर स्थित है देवी का मंदिर

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virbhadra singh jayanti shimla birth anniversary events himachal

मंडी। हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की जन्म जयंती पर आज शिमला में कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। शिमला में स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया।

वीरभद्र सिंह की जयंती

हिमाचल के राज्यपाल कंविद्र गुप्ता ने सुबह रिज पहुंचकर स्वर्गीय वीरभद्र सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। कुछ ही देर में प्रदेश के CM सुखविंद्र सिंह सुक्खू समेत कई अन्य नेता स्वर्गीय वीरभद्र सिंह को पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।

 

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आज स्वर्गीय वीरभद्र सिंह की जयंती पर अपने इस लेख में हम आपको उनके जीवन से जुड़ा एक किस्सा बताएंगे। वीरभद्र सिंह की एक शादी हो चुकी थी। इस शादी से उन्हें एक बेटी की प्राप्ति हुई। इसके बाद उनकी पत्नी का देहांत हो गया।

वंश कौन आगे बढ़ाएगा....

वंश कौन आगे बढ़ाएगा, इसके चलते उन्होंने प्रतिभा सिंह से दूसरी शादी की। फिर राजा वीरभद्र ने मंडी की मां शिकारी देवी से पुत्र प्राप्ति की मन्नत मांगी। मां के आशीर्वाद से विक्रमादित्य के रूप में वीरभद्र और प्रतिभा सिंह को बेटे की प्राप्ति होती है।

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प्रतिभा सिंह से की शादी

मंडी जिले में जंजैहली नाम की जगह है। मंदिर यहां से 18 किलोमीटर की दूरी पर है। ये मंदिर जंगलों के बीचों-बीच स्थित है। मंडी के सबसे ऊंचे शिखर के चलते इसे मंडी का क्राउन यानी मंडी का मुकुट भी कहा जाता है।

विक्रमादित्य के रूप में हुई थी पुत्र प्राप्ति

शिकारी देवी मंदिर दूसरों मंदिरों से अलग है। आमतौर पर मंदिर एक प्रकार के बनाए जाते हैं जो ऊपर से बंद होते हैं लेकिन शिकारी देवी मंदिर में ऐसा नहीं है। इस मंदिर में छत ही नहीं है। ये सीधे आकाश से आंखें मिलाता है। कहते हैं कि माता खुले आसमान में रहना पसंद करती हैं। जब भी यहां छत बनाने की कोशिश की गई, वो विफल रही। 

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मंदिर पर नहीं जमती बर्फ

सर्दियों में मंदिर स्थान में भारी बर्फ गिरती है। मंदिर के आसपास ही 6-7 फीट तक बर्फ जमा हो जाती है लेकिन मंदिर के ठीक ऊपर ना तो बर्फ टिकती है, ना ही जमती है। इसे मां का चमत्कार कहना गलत नहीं होगा।

पांडवों ने बनवाया था मंदिर

कथाओं के मुताबिक महर्षि मार्केंडेय ने इस स्थान पर घोर तप किया था। ये भी कहा जाता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के समय में मंदिर बनवाया था। पांडवों की तपस्या से खुश होकर मां दुर्गा यहां प्रकट हुईं। इसी दौरान मां ने उन्हें युद्ध में विजयी रहने का आर्शीवाद दिया। 

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विक्रमादित्य ने टेका था माथा

इसी मंदिर में जब राजा वीरभद्र ने बेटे की मन्नत मांगी तो मां ने वो दुआ पूरी की। साल 2024 में उनके ही बेटे विक्रमादित्य सिंह ने मंदिर पहुंचकर मां के दर्शन किए थे और उन्हीं ने ये बताया था कि उनके पिता ने उनके लिए इसी मंदिर में मन्नत मांगी थी।

 

विक्रमादित्य हुए भावुक

 

वहीं, आज लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी पिता वीरभद्र सिंह की जयंती पर सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की है। उन्होंने लिखा-
 
शारीरिक रूप से दूर हो जाने से रिश्ते ख़त्म नहीं होते, वो यादों के रूप में दिल की गहराइयों में और मज़बूत हो जाते हैं। आज मेरे पूज्य पिता, हम सभी के मार्गदर्शक और जन-जन के प्रिय स्वर्गीय वीरभद्र सिंह जी की जन्म जयंती है। आज का दिन मेरे लिए केवल उनकी यादों का दिन नहीं है, बल्कि उनके द्वारा दिखाए गए सत्य, सेवा और समर्पण के मार्ग को दोहराने का दिन है।
 
पिताजी, आपके जाने के बाद भी ऐसा कोई पल नहीं बीतता जब मुझे आपकी कमी महसूस न होती हो। आपकी वो सौम्य मुस्कान, हर परिस्थिति में अडिग रहने का आपका साहस, और समाज के हर व्यक्ति के प्रति आपका अगाध प्रेम—आज भी मेरे भीतर एक नई ऊर्जा भर देता है। 
आपने अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया। आज जब मैं लोगों की आँखों में आपके प्रति वही पुराना आदर, सम्मान और असीम स्नेह देखता हूँ, तो मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। आप कल भी इस माटी के 'राजा' थे, और आज भी लोगों के दिलों के राजा हैं।
 
आज उनकी जन्म जयंती पर मैं उन्हें कोटि-कोटि नमन करता हूँ। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि वे जहाँ भी हों, उनका आशीर्वाद और उनकी दी हुई सीख हमेशा हमारा मार्गदर्शन करती रहे। आप हमेशा हमारे विचारों में, हमारी प्रार्थनाओं में और हमारे हर अच्छे कार्य में जीवित रहेंगे। आपकी विरासत को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाना ही आपको मेरी सबसे सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

 

 

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