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November 18, 2025
विमल नेगी केस : देशराज की जमानत से नाराज हुई अदालत, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई CBI की क्लास
सीबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच कर रही सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी और तीखी फटकार लगाई है। अदालत ने जांच अधिकारी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि “ऐसे अधिकारी को सेवा में रहने का कोई अधिकार नहीं है।”
बतौर रिपोर्टर्स, अदालत की टिप्पणी ने न केवल सीबीआई पर दबाव बढ़ा दिया, बल्कि इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़ा कर दिया। मार्च 2024 में इंजीनियर विमल नेगी का शव बिलासपुर की गोबिंद सागर झील के किनारे मिला था।
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शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन परिवार ने इसे साज़िश बताकर विरोध किया। उनकी पत्नी किरण नेगी ने एक आईएएस अधिकारी सहित कई लोगों पर प्रताड़ना और मानसिक दबाव डालने के आरोप लगाए थे। हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे सीबीआई को सौंप दिया।
जल्द ही पावर कॉरपोरेशन के निदेशक देशराज का नाम भी सामने आया, जिसने गिरफ्तारी से बचने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की। जब जमानत पर सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत से कहा कि आरोपी जांच में सहयोग नहीं कर रहे, तो सुप्रीम कोर्ट बेंच जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा सीधे भड़के।
“ये कैसी दलील है? आरोपी से क्या उम्मीद है कि वह खुद जुर्म कबूल करेगा?” “रिपोर्ट में कोई ठोस सबूत नहीं है, सिर्फ बयानबाज़ी है।” “जांच अधिकारी पूरी तरह बोगस है, इसे सेवा से बाहर क्यों न किया जाए?”
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जस्टिस अमानुल्लाह ने सीबीआई के अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से तलब कर कठोर शब्दों में कहा कि जांच पत्र में तथ्यों का एक भी सशक्त पैराग्राफ नहीं है। अदालत के अनुसार सीबीआई ने गंभीर मामले पर बचकाने स्तर की रिपोर्ट पेश की।
गहन सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने देशराज को शर्तों के साथ अग्रिम ज़मानत दे दी। अदालत ने कहा- देशराज को हर पूछताछ में सहयोग करना होगा और जांच में बाधा डालने पर जमानत रद्द हो सकती है हाईकोर्ट ने इससे पहले जमानत देने से साफ़ इनकार कर दिया था, इसलिए यह फ़ैसला राहत जरूर है, पर सीबीआई के लिए बड़ा झटका भी।
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अदालत की टिप्पणियों ने इस संवेदनशील मामले की जांच पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। सवाल ये उठ रहा है- क्या सच में जांच निष्पक्ष दिशा में आगे बढ़ रही है, या फिर यह पूरे मामले को और उलझा रही है? अब नज़रें 29 नवंबर की अगली सुनवाई पर हैं, जब अदालत इस मामले में आगे की दिशा तय करेगी।