#विविध
February 22, 2025
हिमाचल में बढ़ रहा झीलों का आकार, बाढ़ से उजड़ सकते हैं कई गांव
मणिकर्ण वैली की पार्वती और किन्नौर की बस्पा नदी में बाढ़ का खतरा
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कुल्लू/किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की वासुकी झील और किन्नौर जिले की सांगला झील के आकार में जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों के पिघलने के कारण वृद्धि हुई है, जिससे इन झीलों से बहने वाली नदियों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। हालांकि, इन झीलों में अभी कोई लीकेज नहीं पाया गया है और यह पूरी तरह से सुरक्षित हैं, मगर स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इनका नियमित सर्वेक्षण किया जा रहा है।
कुल्लू जिले के सोसन में स्थित वासुकी झील और किन्नौर जिले के सांगला में स्थित सांगला झील के आकार में 2017 से 2024 के बीच वृद्धि दे्खने को मिली है। वासुकी झील की परिधि 1.65 किमी तक बढ़ चुकी है और इसका क्षेत्रफल 3.02 हेक्टेयर बढ़ा है। 2017 में इस झील का क्षेत्रफल 10.36 हेक्टेयर था, जो अब 13.38 हेक्टेयर हो गया है। वहीं, सांगला झील का क्षेत्रफल भी 0.87 हेक्टेयर बढ़ा है, जो 2017 में 13.4 हेक्टेयर था, और अब बढ़कर 14.29 हेक्टेयर हो गया है।
ग्लेशियरों और झीलों के सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, वासुकी झील और सांगला झील के जलस्तर के बढ़ने से पार्वती और बस्पा नदियों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है। पार्वती नदी को विशेष रूप से संवेदनशील माना गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सांगला झील के फटने से किन्नौर में स्थित JWS बास्पा हाइडल प्रोजेक्ट पर असर पड़ सकता है और सांगला क्षेत्र में जान-माल की हानि भी हो सकती है।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इन झीलों का हर वर्ष फील्ड सर्वे करवाया जाए और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न खतरों से बचने के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाए। इसके साथ ही, झीलों के पानी के बहाव की निरंतर निगरानी की आवश्यकता है, ताकि किसी भी प्रकार की आपदा से पहले चेतावनी मिल सके।